नई दिल्ली/22 अगस्त 2026: नई दिल्ली में आयोजित 11वें BRICS+ लीगल फोरम में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने न्यायपालिका, मजबूत संस्थाओं और आर्थिक विकास के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसी देश की तरक्की केवल भूगोल की स्थिति या प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता से तय नहीं होती। इसके लिए भरोसेमंद संस्थाएं, कानून का शासन और न्यायिक व्यवस्था की मजबूती भी उतनी ही जरूरी है।
न्याय-नॉमिक्स क्या है? CJI सूर्यकांत ने समझाया
CJI सूर्यकांत ने अपने संबोधन में ‘न्याय-नॉमिक्स’ यानी Economics of Justice की अवधारणा सामने रखी। उनका कहना था कि जब अदालतें मामलों का लगातार और भरोसेमंद तरीके से निपटारा करती हैं, तो कानूनी प्रक्रिया पर लोगों का विश्वास बढ़ता है। इसका सीधा असर कारोबारी माहौल पर पड़ता है।
उनके अनुसार, न्यायिक प्रक्रिया में स्थिरता और भरोसा लेन-देन की लागत कम करता है। इससे बाजार में सभी पक्षों के लिए अपेक्षाकृत समान अवसर बनते हैं और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलती है।
संस्थाएं विकास की ‘आर्किटेक्चर’ हैं
CJI ने कहा कि कानूनी संस्थाएं आर्थिक विकास शुरू होने के बाद उसके चारों ओर खड़ा किया गया कोई अस्थायी ढांचा नहीं हैं। बल्कि ये विकास की बुनियादी आर्किटेक्चर हैं। यदि मजबूत संस्थागत आधार हटा दिया जाए तो तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की मजबूती पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि BRICS+ देशों की आर्थिक प्रगति केवल प्राकृतिक संसाधनों की वजह से नहीं हुई है। विकास इस बात से भी जुड़ा है कि इन देशों में किए गए वादों और समझौतों को कितनी प्रभावी तरीके से लागू कराया जा सकता है।
‘न्याय सेतु’ से जुड़ेंगी 11 कानूनी परंपराएं
CJI सूर्यकांत ने अपने भाषण में ‘न्याय सेतु’ का विचार भी रखा। उन्होंने इसे ऐसा पुल बताया जो BRICS+ से जुड़ी 11 अलग-अलग कानूनी परंपराओं को आपस में जोड़ सकता है। इसका मूल उद्देश्य देशों के बीच कानूनी समझ और भरोसे को मजबूत करना है।
उन्होंने BRICS+ Judicial Fellowship शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा। इसके तहत सदस्य देशों के न्यायाधीश एक-दूसरे की अदालतों में सीमित अवधि के लिए कामकाज को समझ सकेंगे। इसके अलावा साझा jurisprudence repository बनाने का सुझाव दिया गया, ताकि एक देश में दिए गए महत्वपूर्ण फैसले से दूसरे देश की अदालतें भी समान कानूनी मामलों में सीख ले सकें।
कारोबार और निवेश के लिए क्यों अहम है न्याय व्यवस्था?
किसी कारोबारी के लिए सिर्फ बाजार का आकार मायने नहीं रखता। वह यह भी देखता है कि विवाद होने पर उसका समाधान कितनी जल्दी और निष्पक्ष तरीके से होगा, अनुबंध कितने भरोसेमंद हैं और अदालतों के फैसलों को कितनी प्रभावी तरह लागू कराया जा सकता है।
यही वह जगह है जहां न्याय-नॉमिक्स की अवधारणा अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ती है। भरोसेमंद न्याय व्यवस्था निवेशकों के जोखिम को कम करने और कारोबारी विश्वास बढ़ाने में मदद कर सकती है। CJI का संदेश मूलतः यही था कि आर्थिक विकास की लंबी दौड़ में संस्थागत भरोसा किसी प्राकृतिक संसाधन से कम महत्वपूर्ण नहीं है।
निष्कर्ष
CJI सूर्यकांत का न्याय-नॉमिक्स पर जोर न्यायपालिका को केवल विवाद निपटाने वाली संस्था के रूप में देखने से आगे ले जाता है। उनका विचार है कि कानून का शासन, भरोसेमंद संस्थाएं और प्रभावी न्याय व्यवस्था आर्थिक स्थिरता की नींव भी तैयार करती हैं। वहीं ‘न्याय सेतु’ का प्रस्ताव BRICS+ देशों के बीच कानूनी सहयोग और आपसी विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हो सकता है।












