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40 हजार नियम हटे, 1500 कानून खत्म: पीएम मोदी बोले- परमिशन राज से बाहर निकल रहा भारत, दुनिया को भारत से उम्मीद

On: August 21, 2026
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पीएम मोदी बोले- परमिशन राज से बाहर निकल रहा भारत, दुनिया को भारत से उम्मीद
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नई दिल्ली/21 अगस्त 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत में हो रहे नीति और शासन सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि देश अब पुराने ‘परमिशन राज’ से निकलकर ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जहां कानून में स्पष्ट रोक न होने तक काम करने की अनुमति हो। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले वर्षों में 40 हजार से अधिक अनुपालन (compliances) खत्म किए हैं और 1,500 से ज्यादा पुराने कानूनों को समाप्त किया है।

प्रधानमंत्री ने एक निजी मीडिया कार्यक्रम में कहा कि भारत में सुधार अब केवल आर्थिक नीतियों तक सीमित नहीं हैं। इनका उद्देश्य शासन व्यवस्था को सरल बनाना, कारोबार के लिए माहौल बेहतर करना और आम लोगों के लिए जीवन को आसान बनाना भी है।

40 हजार नियम हटने से कैसे बदली व्यवस्था?

पीएम मोदी ने भारत की पुरानी और नई प्रशासनिक सोच के बीच अंतर समझाते हुए कहा कि पहले व्यवस्था का नजरिया ‘Prohibited Unless Permitted’ यानी अनुमति मिलने तक किसी काम को प्रतिबंधित मानने वाला था। अब सरकार ‘Permitted Unless Prohibited’ यानी कानून में रोक न होने तक काम को अनुमति देने वाली सोच की दिशा में आगे बढ़ रही है।

यह बदलाव खास तौर पर उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है जहां छोटे-छोटे नियामकीय नियम कारोबार, निवेश और नवाचार की गति को प्रभावित करते हैं।

प्रधानमंत्री के अनुसार, अब तक 40 हजार से अधिक अनुपालन हटाए गए हैं। इसके साथ ही 1,500 से अधिक पुराने कानूनों को खत्म किया गया है। सरकार का तर्क है कि इससे उद्योगों और कारोबारों पर अनावश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक बोझ कम हुआ है।

पुराने कानूनों की जगह डिजिटल व्यवस्था

पीएम मोदी ने संसद के मानसून सत्र में पारित Bankers’ Books Evidence Act, 1891 की जगह लाए गए नए कानून का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करीब 19वीं सदी के ब्रिटिश दौर के कानून को बदलकर बैंकिंग क्षेत्र के डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता देने वाली व्यवस्था लाई गई है।

इस तरह के बदलावों का व्यापक उद्देश्य यह है कि कानून उस समय की तकनीक और आर्थिक व्यवस्था के अनुरूप हों। पुरानी कागजी प्रक्रियाओं के बजाय डिजिटल रिकॉर्ड को स्वीकार करना इसी बदलाव का उदाहरण है।

भारत को दुनिया क्यों मान रही ‘ब्राइट स्पॉट’?

प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में विकास को लेकर कई देशों के सामने चुनौतियां हैं। संसाधनों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

ऐसे माहौल में भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘ब्राइट स्पॉट’ के रूप में देखा जा रहा है। पीएम मोदी के मुताबिक, इसका आधार केवल आर्थिक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि लगातार किए जा रहे नीतिगत और प्रशासनिक सुधार भी हैं।

उन्होंने कहा कि भारत विकास की गति को बनाए रखने के लिए लगातार नए कदम उठा रहा है। सुधारों को सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता बताते हुए उन्होंने कहा कि इनका सीधा संबंध देश की क्षमता बढ़ाने और लोगों के जीवन को आसान बनाने से है।

ड्रोन से सीमा सड़क तक, सुधारों का असर

प्रधानमंत्री ने कहा कि नीति सुधारों के कारण जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और ड्रोन जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुली हैं। नियमों में बदलाव से ड्रोन के इस्तेमाल का दायरा बढ़ा है और स्टार्टअप्स को भी काम करने के नए अवसर मिले हैं।

सीमा क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सड़क, पुल और सुरंगों के निर्माण की गति तेज हुई है। पीएम मोदी ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में सीमा सड़क संगठन (BRO) ने 250 बुनियादी ढांचा परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कीं।

यह बदलाव रणनीतिक दृष्टि से भी अहम है, क्योंकि सीमावर्ती इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी से सुरक्षा के साथ स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलती है।

99.9% समय पर पूरी हो रहीं परियोजनाएं

पीएम मोदी ने कहा कि सुशासन का आकलन केवल नीतियां बनाने से नहीं किया जा सकता। किसी नीति की वास्तविक सफलता तब दिखती है, जब उसके आधार पर शुरू की गई परियोजनाएं समय पर पूरी हों और नागरिकों को सेवाएं कुशल तरीके से मिलें।

इसी संदर्भ में उन्होंने दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर और दिल्ली मेट्रो का उदाहरण दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन दोनों परियोजनाओं की समयबद्धता 99.9 प्रतिशत है।

उन्होंने इसे भारत में बदलते शासन मानकों और बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्टों को निर्धारित समय में पूरा करने की बढ़ती क्षमता का उदाहरण बताया।

रेलवे के बायो-टॉयलेट से समझाया स्वच्छता सुधार

प्रधानमंत्री ने रेलवे में स्वच्छता को भी शासन सुधार का एक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि एक समय रेलवे पटरियों पर गंदगी और मानव अपशिष्ट बड़ी समस्या थी।

पीएम मोदी के मुताबिक, 2014 से पहले ट्रेनों में करीब 12 हजार बायो-टॉयलेट थे, जबकि 2014 के बाद 3.60 लाख से अधिक बायो-टॉयलेट लगाए गए।

उन्होंने इसे सिर्फ स्वच्छता का अभियान नहीं माना, बल्कि यात्रियों की गरिमा और बेहतर सार्वजनिक सेवाओं से जोड़कर देखा। उनके मुताबिक, इस तरह के बदलाव बताते हैं कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि नागरिकों के रोजमर्रा के अनुभव को बदलना भी है।

‘प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट’ से PLI तक का सफर

प्रधानमंत्री ने उत्पादन नीति में बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले की व्यवस्था में उत्पादन बढ़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध और दंडात्मक प्रावधान सामने आते थे। अब सरकार ने इसके विपरीत Production Linked Incentive (PLI) जैसी योजनाओं के जरिए उत्पादन बढ़ाने को प्रोत्साहित करने का रास्ता चुना है।

पीएम मोदी ने इसे अपने शब्दों में ‘Production Linked Punishment’ से ‘Production Linked Incentive’ की ओर बदलाव बताया।

उनका कहना था कि सरकार का लक्ष्य कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने, निवेश करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

लाइसेंस राज से बाहर निकलने पर जोर

प्रधानमंत्री ने पुराने लाइसेंस राज की व्यवस्था पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पहले ऐसी नीतियां थीं जिनमें लोगों को कई बुनियादी जरूरतों के लिए भी सरकारी अनुमति और प्रक्रियाओं पर निर्भर रहना पड़ता था।

उनके मुताबिक, इस तरह की व्यवस्था आर्थिक गतिविधियों को सीमित करती थी और रोजगार के अवसरों पर भी असर डालती थी। इसके मुकाबले आज सरकार का जोर उत्पादन, निवेश और उद्यमिता को प्रोत्साहन देने पर है।

यही कारण है कि PLI जैसी योजनाओं को केवल उद्योग नीति नहीं, बल्कि रोजगार और आर्थिक अवसर पैदा करने के व्यापक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

सुधारों का अगला चरण कितना अहम?

पीएम मोदी के बयान का व्यापक संदेश यह है कि भारत में आर्थिक सुधारों के साथ-साथ शासन सुधार भी विकास की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। नियमों को सरल करना, पुराने कानून हटाना, डिजिटल प्रक्रियाओं को स्वीकार करना और परियोजनाओं की समयबद्धता बढ़ाना इसी दिशा के अलग-अलग पहलू हैं।

हालांकि, किसी भी सुधार की वास्तविक परीक्षा उसके जमीन पर लागू होने और नागरिकों व कारोबारियों को मिलने वाले ठोस लाभ से होती है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नियमों में कमी और प्रक्रियाओं के सरलीकरण का असर निवेश, रोजगार, उत्पादकता और आम लोगों के दैनिक जीवन पर कितना पड़ता है।

फिलहाल प्रधानमंत्री के मुताबिक भारत का लक्ष्य साफ है—कम अनावश्यक अनुमति, कम अनुपालन और ज्यादा अवसर। यही बदलाव भारत को पुराने परमिशन राज से बाहर निकालकर अधिक गतिशील अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने की कोशिश का हिस्सा है।

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