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जकार्ता में पीएम मोदी ने नेहरू को किया याद, भारत-इंडोनेशिया के ऐतिहासिक रिश्तों का किया उल्लेख

On: July 7, 2026
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जकार्ता में पीएम मोदी ने नेहरू को किया याद
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नई दिल्ली/07 जुलाई 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंडोनेशिया दौरे के दूसरे दिन जकार्ता में इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक रिश्तों को नई मजबूती देने का संदेश दिया। अपने भाषण में उन्होंने दोनों देशों के साझा इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और इंडोनेशिया का संबंध केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें रामायण काल और सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत में हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भी याद किया और कहा कि वर्ष 1955 के बांदुंग सम्मेलन में नेहरू और इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति सुकर्णो ने दुनिया को यह संदेश दिया था कि स्वतंत्र राष्ट्रों को अपने निर्णय स्वयं लेने का अधिकार है।

राष्ट्रपति प्रबोवो ने सर्वोच्च सम्मान से किया सम्मानित

संसद को संबोधित करने से पहले इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिन्तांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ से सम्मानित किया। इस सम्मान के लिए प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति प्रबोवो और इंडोनेशिया की जनता का आभार व्यक्त किया और इसे दोनों देशों की मजबूत मित्रता का प्रतीक बताया।

बांदुंग सम्मेलन का किया जिक्र, नेहरू और सुकर्णो की भूमिका बताई

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 1955 का बांदुंग सम्मेलन एशिया और अफ्रीका के नवस्वतंत्र देशों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। उस सम्मेलन में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो ने वैश्विक मंच पर स्वतंत्र देशों की संप्रभुता, समानता और स्वतंत्र विदेश नीति की वकालत की थी।

उन्होंने कहा कि आज भी दोनों देश उसी साझी सोच और सहयोग की भावना के साथ भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं।

रामायण से लेकर संस्कृति तक, सदियों पुराने हैं दोनों देशों के संबंध

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल आधुनिक दौर के नहीं हैं। दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्ते हजारों वर्षों से जुड़े हुए हैं। इंडोनेशिया में आज भी रामायण और महाभारत की कथाएं लोकनाट्य, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

जावा सहित इंडोनेशिया के कई क्षेत्रों में खुले मंचों पर रामायण आधारित नृत्य-नाटिकाओं का मंचन होता है। यहां के मंदिरों, मूर्तिकला और स्थापत्य कला में भी भारतीय संस्कृति और प्राचीन सभ्यता की स्पष्ट झलक देखने को मिलती है।

संस्कृत, ब्राह्मी और भारतीय परंपराओं का भी रहा प्रभाव

इतिहासकारों और विभिन्न शोधों के अनुसार, भारत से ही हिंदू और बौद्ध धर्म, संस्कृत भाषा तथा ब्राह्मी लिपि का प्रभाव इंडोनेशिया तक पहुंचा। आज भी इंडोनेशिया की कई स्थानीय भाषाओं में संस्कृत और तमिल मूल के अनेक शब्द प्रचलित हैं।

इतना ही नहीं, ‘इंडोनेशिया’ नाम की उत्पत्ति भी भारत से जुड़ी मानी जाती है। यह नाम लैटिन शब्द ‘इंडस’ (भारत) और ग्रीक शब्द ‘नेसोस’ (द्वीप) से मिलकर बना है, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाता है।

साझी विरासत के साथ भविष्य की साझेदारी पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और इंडोनेशिया आज इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं। साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और विकास की समान आकांक्षाओं के आधार पर दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए मिलकर काम कर सकते हैं।

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