नई दिल्ली/11 सितंबर 2026: नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं की मुलाकात में भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने के साथ कारोबार, ऊर्जा, रक्षा और औद्योगिक सहयोग समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान रिश्तों की गर्माहट भी साफ नजर आई। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और गले मिले। इसके बाद पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति को तमिल संत और कवि तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी संस्करण भेंट किया।
पीएम मोदी-पुतिन की बैठक में तिरुक्कुरल का खास संदेश
तिरुक्कुरल की रूसी प्रति भेंट करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी सांस्कृतिक महत्ता भी बताई। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है। संत तिरुवल्लुवर ने अपनी इस रचना में मानव जीवन, नैतिकता और सामाजिक मूल्यों से जुड़े कई पहलुओं को बेहद गहराई से प्रस्तुत किया है।
तिरुक्कुरल तमिल साहित्य की सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण रचनाओं में गिनी जाती है। इसे कई बार ‘तमिल वेद’ के नाम से भी संबोधित किया जाता है। माना जाता है कि यह कृति करीब 2,000 वर्ष पुरानी है। ऐसे में इसका रूसी संस्करण भेंट करना भारत की सांस्कृतिक विरासत को रूस तक पहुंचाने का भी एक प्रतीकात्मक संदेश है।
पीएम मोदी-पुतिन की बैठक में कारोबार और औद्योगिक सहयोग पर जोर
भारत और रूस के बीच आर्थिक रिश्तों को नई गति देना भी पीएम मोदी-पुतिन की बैठक के प्रमुख मुद्दों में रहा। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर जोर दिया है।
बैठक के एजेंडे में भारत में रूस के प्रमुख औद्योगिक मंच INNOPROM से जुड़ी गतिविधियों के जरिए औद्योगिक सहयोग बढ़ाना भी शामिल है। इसके अलावा रेल क्षेत्र और टनलिंग में सहयोग, स्टील वैल्यू चेन विकसित करने तथा रूसी बाजार में भारतीय कंपनियों के लिए ज्यादा B2B अवसर तैयार करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
भारत के लिए यह सहयोग केवल व्यापार के आंकड़ों तक सीमित नहीं है। स्टील, रेल, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक उत्पादन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ने से दोनों देशों की कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं।
ऊर्जा और परमाणु क्षेत्र में सहयोग भी अहम
ऊर्जा क्षेत्र भारत-रूस संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है। दोनों देशों के बीच सिविल न्यूक्लियर सहयोग को मजबूत करने पर भी चर्चा का फोकस है। इसमें फ्यूल साइकिल और लाइफ साइकिल सपोर्ट जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है।
इसके साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों यानी क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर है। आधुनिक उद्योग और नई ऊर्जा तकनीकों के विस्तार के दौर में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति रणनीतिक रूप से काफी अहम हो गई है।
फर्टिलाइजर सेक्टर में भी दोनों देशों के बीच सहयोग जारी रखने और उसे और विस्तार देने की योजना है। इसके लिए रणनीतिक संयुक्त उपक्रम यानी JV प्रोजेक्ट्स के जरिए साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
भारतीय कुशल श्रमिकों के लिए रूस में बढ़ेंगे अवसर
दोनों देशों के बीच मोबिलिटी और मानव संसाधन सहयोग को भी एजेंडे में जगह मिली है। इसके तहत रूस में भारतीय कुशल श्रमिकों की संख्या बढ़ाने की दिशा में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा है। इससे रोजगार के नए अवसरों के साथ भारत और रूस के आर्थिक संबंधों को जमीनी स्तर पर भी मजबूती मिल सकती है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक संकट के बीच अहम बैठक
दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई मोर्चों पर दबाव का सामना कर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध के अलावा पश्चिम एशिया में जारी संकट, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी परिस्थितियों ने ऊर्जा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर चिंता बढ़ाई है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की व्यापार और टैरिफ नीतियों का असर भी वैश्विक कारोबार पर पड़ रहा है।
ऐसे माहौल में भारत और रूस के शीर्ष नेतृत्व की आमने-सामने बैठक का महत्व और बढ़ जाता है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों के साथ-साथ बदलती वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक और ऊर्जा सहयोग को स्थिर रखना भी एक बड़ी प्राथमिकता है।
क्या है BRICS और कितना महत्वपूर्ण है यह समूह?
BRICS अब 11 देशों का समूह है। इसमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ये देश मिलकर दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, वैश्विक GDP का लगभग 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का करीब 26 प्रतिशत हिस्सा कवर करते हैं। यही वजह है कि BRICS को वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक व्यवस्था में एक प्रभावशाली समूह के तौर पर देखा जाता है।
मौजूदा दौर में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच भारत की BRICS अध्यक्षता भी खास महत्व रखती है। नई दिल्ली की कोशिश ग्लोबल साउथ के हितों को प्रमुखता देने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग को आगे बढ़ाने की दिशा में है। ऐसे में पीएम मोदी और पुतिन की बैठक सिर्फ दो देशों के द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।













