वाराणसी (Mon, 11 May 2026)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को काशी में आयोजित सनातन संकल्प महोत्सव के दौरान सनातन परंपरा और भारतीय सभ्यता को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सनातन किसी एक मंदिर या परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की चेतना, संस्कृति और जीवन दृष्टि में रचा-बसा है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “सनातन को मिटाने वाले खुद मिट्टी में मिल गए। इतिहास गवाह है कि जिन्होंने भारत की आध्यात्मिक पहचान पर हमला किया, आज उनका कोई नामलेवा तक नहीं है।” उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के जयघोष के साथ प्रतिक्रिया दी।
काशी और सोमनाथ को बताया भारतीय सभ्यता का ज्योति स्तंभ
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में आयोजित सनातन संकल्प महोत्सव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी और सोमनाथ केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के दो ऐसे ज्योति स्तंभ हैं जिन्होंने सदियों के संघर्ष के बाद भी अपनी आस्था और पहचान को जीवित रखा।
उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक यात्रा को समझना है तो काशी और सोमनाथ की परंपरा को समझना होगा। यही स्थान भारत की आध्यात्मिक शक्ति और सनातन मूल्यों के प्रतीक हैं। योगी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि सनातन का आधार केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि मानवता, कर्तव्य और सांस्कृतिक निरंतरता है।
ॐ जप, शंखध्वनि और सामूहिक संकल्प ने बनाया आध्यात्मिक माहौल
कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक ‘ॐ जप’ और शास्त्रियों व छात्र-छात्राओं द्वारा की गई शंखध्वनि से हुई। मंदिर परिसर का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
सोमनाथ भवन में विद्यार्थियों द्वारा निर्मित पार्थिव शिवलिंग स्थापित किया गया, जिसे भगवान सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के प्रतीक स्वरूप के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से ‘सोमनाथ संकल्प’ का वाचन किया, जिसका उपस्थित श्रद्धालुओं और अतिथियों ने सामूहिक रूप से उच्चारण किया।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय परंपरा, शिव आराधना और सनातन संस्कृति की झलक भी दिखाई गई। आयोजन का लाइव स्ट्रीम प्रसारण भी किया गया, जिससे देशभर के श्रद्धालु इससे जुड़ सके।
कई मंत्री और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर, हंसराज विश्वकर्मा, डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ और विधायक सौरभ श्रीवास्तव समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए थे।









