राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश राज्य अंतरराष्ट्रीय खेल मनोरंजन एजुकेशन बिजनेस राशिफल

---Advertisement---

स्कूल चलो अभियान में रिकॉर्ड: 20 दिन में 8.79 लाख नए नामांकन, कक्षा 1 और 6 में सबसे ज्यादा होड़

On: April 21, 2026
Follow Us:
स्कूल चलो अभियान में रिकॉर्ड
---Advertisement---

लखनऊ, 21 अप्रैल 2026 (मंगलवार)। उत्तर प्रदेश में शिक्षा के मोर्चे पर इस बार तस्वीर कुछ बदली-बदली नजर आ रही है। स्कूल चलो अभियान ने शुरुआती 20 दिनों में ही ऐसा असर दिखाया है, जिसने सरकारी स्कूलों को लेकर बनी पुरानी धारणाओं को चुनौती दे दी है।

योगी सरकार के इस अभियान के तहत प्रदेशभर में अब तक 8.79 लाख से अधिक नए बच्चों का नामांकन हो चुका है। आंकड़े बताते हैं कि यह महज शुरुआत है—और अगर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले महीनों में यह संख्या और भी चौंकाने वाली हो सकती है।

स्कूल चलो अभियान: शुरुआती 20 दिनों में बड़ा उछाल

अप्रैल से शुरू हुए इस स्कूल चलो अभियान के तहत बेसिक शिक्षा विभाग ने जिस तरह से जमीनी स्तर पर काम किया है, उसका असर साफ दिखाई दे रहा है।

पिछले शैक्षिक सत्र (2025-26) में जहां करीब 34 लाख नए नामांकन हुए थे, वहीं इस बार सिर्फ 20 अप्रैल तक 8,79,000 से ज्यादा बच्चों का दाखिला हो चुका है। यानी कुल लक्ष्य का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा शुरुआती दौर में ही हासिल कर लिया गया है।

प्रदेश के करीब 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों में यह अभियान एक साथ चलाया जा रहा है। गांव-गांव, घर-घर जाकर बच्चों की पहचान और अभिभावकों से संवाद—यही इस सफलता की असली वजह मानी जा रही है।

कक्षा 1 और 6 में सबसे ज्यादा नामांकन, क्यों है खास?

अगर आंकड़ों को ध्यान से देखें, तो एक दिलचस्प ट्रेंड सामने आता है—कक्षा 1 और कक्षा 6 में नामांकन सबसे तेज है।

कक्षा 1 में इस सत्र के पहले 20 दिनों में ही 5,29,726 बच्चों का नामांकन हुआ है, जबकि पिछले पूरे सत्र में यह संख्या 16 लाख के आसपास थी। वहीं कक्षा 6 में 2,73,621 बच्चों ने दाखिला लिया है।

दरअसल, कक्षा 1 बच्चों के औपचारिक शिक्षा में प्रवेश का पहला कदम है, जबकि कक्षा 6 प्राथमिक से उच्च प्राथमिक में बदलाव का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। ऐसे में इन दोनों कक्षाओं पर विशेष ध्यान देना सरकार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

अन्य कक्षाओं में भी लगातार बढ़ रही संख्या

हालांकि फोकस कक्षा 1 और 6 पर ज्यादा दिख रहा है, लेकिन बाकी कक्षाओं में भी नामांकन की रफ्तार बनी हुई है।

  • कक्षा 2: 28,571
  • कक्षा 3: 17,686
  • कक्षा 4: 10,772
  • कक्षा 5: 8,418
  • कक्षा 7: 6,513
  • कक्षा 8: 3,302

ये आंकड़े बताते हैं कि अभियान सिर्फ नए बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि ड्रॉपआउट बच्चों को भी वापस स्कूल लाने की कोशिश जारी है।

घर-घर पहुंच, जागरूकता और जिम्मेदारी

इस स्कूल चलो अभियान की सबसे खास बात इसकी “डोर-टू-डोर” रणनीति है। शिक्षक, शिक्षा मित्र और विभागीय कर्मचारी गांवों में जाकर अभिभावकों से बात कर रहे हैं—उन्हें समझा रहे हैं कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि भविष्य की नींव है।

कई जगहों पर स्थानीय समुदाय, पंचायत और स्वयंसेवी संगठन भी इस पहल में जुड़ते दिख रहे हैं। यही वजह है कि अभियान एक सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़कर सामाजिक आंदोलन जैसा रूप लेता नजर आ रहा है।

आगे की रणनीति: जुलाई तक और तेज होगी रफ्तार

बेसिक शिक्षा विभाग अब अगले चरण के लिए तैयारी में जुट गया है। लक्ष्य साफ है—जुलाई तक ज्यादा से ज्यादा बच्चों को स्कूल से जोड़ना।

इसके लिए अधिकारियों से लेकर शिक्षकों तक को जिम्मेदारी दी गई है कि वे न सिर्फ नामांकन बढ़ाएं, बल्कि बच्चों की नियमित उपस्थिति भी सुनिश्चित करें।

निष्कर्ष: बदलती सोच, बदलती तस्वीर

उत्तर प्रदेश में स्कूल चलो अभियान ने यह संकेत दे दिया है कि अगर योजना सही हो और उसका क्रियान्वयन ईमानदारी से किया जाए, तो सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदली जा सकती है।

अब असली चुनौती यह होगी कि इन बच्चों को सिर्फ स्कूल तक लाना ही नहीं, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़कर बनाए रखना भी सुनिश्चित किया जाए।

फिलहाल, शुरुआती 20 दिनों के ये आंकड़े उम्मीद जरूर जगाते हैं—कि शिक्षा की राह पर प्रदेश एक नई दिशा की ओर बढ़ रहा है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now