लखनऊ, 21 अप्रैल 2026 (मंगलवार)। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने विकास की रफ्तार तेज करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। विधायक निधि 2.50 करोड़ के तहत प्रत्येक विधायक और विधान परिषद सदस्य को पहली किस्त जारी कर दी गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब चुनावी माहौल धीरे-धीरे आकार ले रहा है और सरकार जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
विधायक निधि 2.50 करोड़: कुल 1247.50 करोड़ रुपये जारी
राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विधान मंडल क्षेत्र विकास निधि के तहत कुल 1247.50 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की है।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष प्रति सदस्य 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें से 50 प्रतिशत यानी 2.50 करोड़ रुपये की पहली किस्त अभी जारी की गई है।
विधानसभा और विधान परिषद—दोनों को बराबर हिस्सा
इस निर्णय के तहत:
- विधानसभा के 403 सदस्यों में से वर्तमान 400 विधायकों को 2.50 करोड़ रुपये प्रति सदस्य के हिसाब से कुल 1000 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
- विधान परिषद के 100 में से 99 सदस्यों को भी समान दर से 247.50 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है।
यानी दोनों सदनों को मिलाकर यह राशि 1247.50 करोड़ रुपये बैठती है, जो सीधे उनके-अपने क्षेत्रों में खर्च की जाएगी।
किन कार्यों पर खर्च होगी निधि?
सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि इस विधायक निधि 2.50 करोड़ का उपयोग सिर्फ जनहित के बुनियादी कार्यों में किया जाए।
प्राथमिकता के तौर पर जिन क्षेत्रों को चुना गया है, उनमें शामिल हैं:
- सड़क निर्माण और मरम्मत
- पेयजल व्यवस्था
- नाली और जल निकासी
- सामुदायिक भवन
- शिक्षा से जुड़े संसाधन
- स्वास्थ्य सुविधाएं
यह वे क्षेत्र हैं, जिनका सीधा असर आम जनता के दैनिक जीवन पर पड़ता है।
चुनावी साल से पहले विकास का ‘फास्ट ट्रैक’
राजनीतिक नजरिए से देखें, तो यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि रणनीतिक भी माना जा रहा है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकार चाहती है कि हर क्षेत्र में विकास कार्य नजर आएं—सड़क से लेकर स्कूल और अस्पताल तक। ऐसे में विधायकों को सीधे फंड देकर उन्हें अपने क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर दिया गया है।
क्या बदलेगा जमीनी स्तर पर?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस राशि का सही उपयोग हुआ, तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में छोटे-छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव तेजी से दिख सकते हैं।
अक्सर देखा जाता है कि स्थानीय समस्याएं—जैसे टूटी सड़क, खराब जलनिकासी या प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी—लंबे समय तक बनी रहती हैं। ऐसे में यह निधि उन समस्याओं के त्वरित समाधान का जरिया बन सकती है।
प्रशासन को सख्त निर्देश
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत धनराशि का उपयोग पारदर्शिता और प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।
साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि विकास कार्यों में किसी तरह की देरी या लापरवाही न हो।
निष्कर्ष: विकास और राजनीति—दोनों का संतुलन
विधायक निधि 2.50 करोड़ का यह फैसला उत्तर प्रदेश की राजनीति और विकास दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जहां एक ओर इससे जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलेगी, वहीं दूसरी ओर यह कदम चुनाव से पहले सरकार की सक्रियता और प्राथमिकताओं को भी दर्शाता है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह फंड कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ जनता तक अपना असर पहुंचा पाता है।








