वाराणसी (Tue, 12 May 2026)। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) मंगलवार को आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक संवाद और सनातन परंपरा के विमर्श का केंद्र बना रहा। ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, अटूट आस्था की गौरव गाथा’ के उपलक्ष्य में बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में आयोजित भव्य आध्यात्मिक संगोष्ठी में देशभर से पहुंचे संत-महात्माओं, शिक्षाविदों और धर्माचार्यों ने भारतीय संस्कृति की मूल भावना पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संबोधन दिया और सोमनाथ को भारत के राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक बताया।
संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन की ओर से आयोजित इस संगोष्ठी में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चिंतन का विशेष वातावरण देखने को मिला। सभागार में मौजूद लोगों ने संतों के विचारों को गंभीरता से सुना, वहीं युवाओं की भी बड़ी भागीदारी कार्यक्रम का केंद्र रही।
सीएम योगी बोले- काशी विश्वनाथ और सोमनाथ धर्म के मजबूत स्तंभ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की संस्कृति केवल परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता को जोड़ने वाली जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का इतिहास संघर्ष, पुनर्निर्माण और आत्मगौरव की प्रेरणा देता है।
सीएम योगी ने कहा कि काशी विश्वनाथ और सोमनाथ जैसे तीर्थ भारतीय सभ्यता की आत्मा हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार संतों और धर्माचार्यों के मार्गदर्शन में समाज के उत्थान, सांस्कृतिक संरक्षण और आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करने का कार्य कर रही है।
Somnath Swabhiman Spiritual Seminar में संतों ने दिया एकता और नैतिकता का संदेश
संगोष्ठी में भारतीय संस्कृति, योग, ध्यान, अध्यात्म और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक समय में आध्यात्मिकता केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और सामाजिक सद्भाव की भी आवश्यकता बन चुकी है।
संतों ने युवाओं से भारतीय मूल्यों और नैतिकता को जीवन में अपनाने की अपील की। कई वक्ताओं ने कहा कि तेजी से बदलती जीवनशैली और पश्चिमी प्रभाव के बीच भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत बनाए रखना समय की मांग है।
बाबा रामदेव बोले- आने वाले समय में कई राष्ट्र सनातन को स्वीकार करेंगे
पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के योग गुरु स्वामी रामदेव ने अपने संबोधन में कहा कि देश में सनातन चेतना लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश के बड़े हिस्से में सांस्कृतिक जागरण दिखाई दे रहा है और आने वाले वर्षों में कई राष्ट्र भी सनातन जीवन दर्शन को स्वीकार करेंगे।
उन्होंने योग और अध्यात्म को वैश्विक शांति का माध्यम बताते हुए कहा कि भारत की आध्यात्मिक विरासत पूरी दुनिया के लिए मार्गदर्शक बन सकती है।
अवधेशानंद गिरि ने जताई सांस्कृतिक चुनौतियों पर चिंता
जूना अखाड़ा हरिद्वार के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति आज भी वैचारिक चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव तेजी से जीवनशैली में प्रवेश कर रहा है, ऐसे में समाज को अपनी परंपराओं और मूल्यों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है।
देशभर के संतों और कुलपतियों ने रखे विचार
कार्यक्रम में परमार्थ आश्रम ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद सरस्वती, स्वामी नारायण गुजरात के भद्रेश दास महाराज, दिव्य सेवा मिशन हरिद्वार के डॉ. आशीष गौतम, अयोध्या के जगद्गुरु वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर महाराज, मिथिलेश नंदिनी शरण, आशुतोषानंद गिरि, स्वामी शंकर चैतन्य ब्रह्मचारी समेत कई प्रमुख संत शामिल हुए।
इसके अलावा राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक, बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. ए.के. त्यागी और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने भी भारतीय ज्ञान परंपरा और शिक्षा में आध्यात्मिक मूल्यों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता भवन में श्रद्धा, संस्कृति और सनातन चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला, जहां आध्यात्मिक विमर्श के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।









