नई दिल्ली (12 मई 2026)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोलियम उत्पादों की खपत में संयम बरतने की अपील के बाद देशभर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। सोशल मीडिया से लेकर बाजार तक कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। इसी बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि देश में किसी भी तरह की ईंधन कमी नहीं है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
हालांकि, उन्होंने यह जरूर स्वीकार किया कि तेल विपणन कंपनियों यानी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर बढ़ता आर्थिक दबाव सरकार और उद्योग दोनों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।
देश में कितना सुरक्षित है तेल भंडार?
सीआईआई के वार्षिक सम्मेलन में बोलते हुए हरदीप पुरी ने कहा कि भारत के पास फिलहाल 60 दिनों का कच्चे तेल और एलएनजी (Liquefied Natural Gas) का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसके अलावा करीब 45 दिनों का एलपीजी भंडार भी उपलब्ध है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि देश में कहीं भी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल या डीजल की कमी नहीं है। एलपीजी की सप्लाई भी सामान्य से अधिक बनी हुई है। मंत्री ने अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि लोग अनावश्यक घबराहट से बचें।
पुरी के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारत ने वैकल्पिक देशों से आयात बढ़ाकर सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखा है। उन्होंने इसे भारत की ऊर्जा रणनीति की बड़ी सफलता बताया।
असली चिंता क्या है? तेल कंपनियों पर बढ़ रहा भारी दबाव
हरदीप पुरी ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती ईंधन की उपलब्धता नहीं, बल्कि तेल कंपनियों की आर्थिक स्थिति है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगे दामों पर कच्चा तेल खरीद रही हैं, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक कारणों से उसकी पूरी लागत आम उपभोक्ताओं से नहीं वसूली जा रही।
इसी वजह से कंपनियों को भारी “अंडररिकवरी” का सामना करना पड़ रहा है। पिछले दो महीनों में पेट्रो उत्पादों की बिक्री पर यह अंतर लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
मंत्री ने कहा कि वर्तमान स्थिति में तेल कंपनियां प्रतिदिन करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं। अगर यही हाल बना रहा तो केवल एक तिमाही में 1 लाख करोड़ रुपये तक का वित्तीय दबाव पैदा हो सकता है।
पेट्रोल, डीजल और LPG पर कितना नुकसान?
पुरी ने बताया कि फिलहाल पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 14 रुपये, डीजल पर 42 रुपये और एलपीजी सिलेंडर पर करीब 674 रुपये तक का नुकसान हो रहा है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि बीते चार वर्षों से पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बड़ी वृद्धि नहीं की गई है। फिलहाल देश में पेट्रोल करीब 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।
एलपीजी की कीमतों में मार्च 2026 में कुछ संशोधन जरूर किया गया था, लेकिन इसके बावजूद सिलेंडर की बिक्री लागत से नीचे बनी हुई है।
पीएम मोदी की अपील को बताया ‘Visionary’
हरदीप पुरी ने प्रधानमंत्री मोदी की ईंधन बचत वाली अपील को “विजनरी” करार दिया। उन्होंने कहा कि इसका मतलब किसी प्रकार की राशनिंग या लॉकडाउन नहीं है, बल्कि संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग का संदेश देना है।
उन्होंने उद्योग जगत और आम नागरिकों से सार्वजनिक परिवहन, कार पूलिंग और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ाने की अपील की। साथ ही उद्योगों से आग्रह किया गया कि जहां संभव हो, एलपीजी की जगह पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का उपयोग बढ़ाया जाए।
लंबा संकट बढ़ा सकता है दबाव
पुरी ने संकेत दिए कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहते हैं तो सरकार को कुछ क्षेत्रों में खपत कम करने और ईंधन उपयोग की प्राथमिकताओं को नए सिरे से तय करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। उनके बयान से साफ है कि सरकार तत्काल संकट से इनकार कर रही है, मगर वैश्विक बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए भविष्य की रणनीति पर भी काम शुरू हो चुका है।











