नई दिल्ली|23 जुलाई 2026: जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल के 26वें दिन समर्थकों से हर परिस्थिति में शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने की अपील की है। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती वांगचुक ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह अहिंसा के सिद्धांत पर आधारित है और किसी भी प्रकार की हिंसा के लिए इसमें कोई जगह नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व आंदोलन को बदनाम करने के उद्देश्य से हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।
‘हमारी प्रतिक्रिया सिर्फ फूलों की होनी चाहिए’
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन अब भी पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। हालांकि, उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ स्थानों पर कुछ लोग आंदोलन का फायदा उठाकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने लिखा, “मेरा रास्ता सिर्फ शांति और शांति है। दूसरी तरफ से चाहे जो भी किया जाए, हमारी प्रतिक्रिया सिर्फ फूलों के रूप में होनी चाहिए। कृपया हर हाल में इस परंपरा को बनाए रखें।”
वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे किसी भी उकसावे में न आएं और आंदोलन की शांतिपूर्ण पहचान को बनाए रखें।
किन शर्तों पर खत्म करेंगे भूख हड़ताल?
एक दिन पहले जारी अपने संदेश में वांगचुक ने स्पष्ट किया था कि वह तब तक अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे, जब तक सरकार प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट आश्वासन नहीं देती।
उन्होंने मांग रखी कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों और अन्य लोगों के खिलाफ कोई एफआईआर, कानूनी कार्रवाई या ऐसा कदम न उठाया जाए जिससे उन्हें पुलिस कार्रवाई या जेल का डर हो। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग से बचे।
वांगचुक ने कहा कि यदि सरकार जल्द ऐसा भरोसा देती है तो वह समर्थकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए तत्काल अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं। अन्यथा उन्हें मजबूरन अपनी भूख हड़ताल जारी रखनी पड़ेगी।
मेदांता अस्पताल ने स्वास्थ्य को लेकर क्या बताया?
गुरुवार को मेदांता अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल अपडेट में बताया गया कि सोनम वांगचुक की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है। अस्पताल के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों की बहु-विषयक टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है।
अस्पताल ने अपने बयान में कहा कि वांगचुक पूरी तरह सचेत हैं और उनके सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेत स्वीकार्य सीमा के भीतर हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि उन्हें दिया जा रहा उपचार उनकी सूचित सहमति के अनुरूप किया जा रहा है।
गौरतलब है कि इससे पहले उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था।
25 दिन में 11 किलो वजन घटने की दी थी जानकारी
बुधवार को साझा किए गए एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने बताया था कि उन्होंने 25 दिन का उपवास पूरा कर लिया है और इस दौरान उनका करीब 11 किलोग्राम वजन कम हो गया है।
उन्होंने कहा, “मैं अभी भी जीवित हूं। यह मेरे उपवास का 25वां दिन है। अब तक मेरा 11 किलोग्राम वजन कम हो चुका है और शरीर की मांसपेशियों का भी काफी नुकसान हुआ है। फिर भी मैं ठीक हूं।”
‘चलो संसद’ मार्च में शामिल छात्रों की सराहना
वांगचुक ने 20 जुलाई को आयोजित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के ‘चलो संसद’ मार्च का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पुलिस कार्रवाई और कथित उकसावे के बावजूद छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, जो आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने कहा, “लाठियां खाने के बाद भी छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। उकसावे और पत्थरबाजी कराने की कोशिशों के बावजूद आपने धैर्य बनाए रखा। इससे मेरा दिल पिघल गया।”
वांगचुक ने यह भी बताया कि कई केंद्रीय मंत्रियों, विपक्षी नेताओं और 65 सांसदों के हस्ताक्षर वाले पत्र के माध्यम से उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की गई है। उन्होंने कहा कि वह भी जल्द अपने काम पर लौटना चाहते हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा को लेकर ठोस आश्वासन मिलने के बाद ही अपना अनशन समाप्त करेंगे।











