लखनऊ/14 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश में फ्लैट और प्लॉट खरीदने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। यूपी रेरा (उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण) ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी आवंटी का फ्लैट या भूखंड का आवंटन रद्द होता है, अनुबंध समाप्त हो जाता है या पूरी परियोजना ही निरस्त हो जाती है, तो संबंधित रियल एस्टेट प्रमोटर को GST सहित पूरी जमा राशि लौटानी होगी।
प्राधिकरण का यह आदेश ऐसे समय आया है, जब कई मामलों में बिल्डरों द्वारा केवल मूल राशि वापस की जा रही थी, जबकि खरीदार से वसूला गया जीएसटी वापस नहीं किया जा रहा था। इससे घर खरीदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था।
परियोजना रद्द होने पर अब GST भी लौटाना होगा
यूपी रेरा के नए निर्देश के मुताबिक, यदि किसी आवंटी ने फ्लैट या भवन निर्माण के लिए भूखंड खरीदते समय जीएसटी का भुगतान किया है और बाद में किसी कारण से परियोजना निरस्त हो जाती है, अनुबंध खत्म हो जाता है या आवंटन रद्द कर दिया जाता है, तो प्रमोटर को जीएसटी सहित पूरी धनराशि लौटानी होगी।
हालांकि, यदि संबंधित जीएसटी की राशि पहले ही सरकार के जीएसटी खाते में जमा की जा चुकी है और उसे प्रमोटर सीधे वापस नहीं कर सकता, तो आवंटी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत जीएसटी रिफंड का दावा करने का अधिकार होगा।
अधिक GST वसूली की शिकायतों के बाद सख्त हुआ प्राधिकरण
प्राधिकरण के संज्ञान में ऐसे कई मामले आए, जिनमें रियल एस्टेट परियोजनाओं के प्रमोटरों ने खरीदारों से निर्धारित दर से अधिक जीएसटी वसूला। वहीं, अनुबंध समाप्त होने या आवंटन रद्द होने के बाद केवल फ्लैट या प्लॉट की कीमत लौटाई गई, लेकिन जीएसटी वापस नहीं किया गया। कई मामलों में उसी संपत्ति को दोबारा बेचकर फिर से जीएसटी भी वसूला गया।
यूपी रेरा ने कहा कि 8 जनवरी 2025 को इस संबंध में पहले भी निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन कुछ परियोजनाओं में उनका पालन नहीं किया गया। अब सभी रियल एस्टेट प्रमोटरों को केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित जीएसटी दरों और नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
घर खरीदार ऐसे कर सकेंगे GST रिफंड का दावा
यदि प्रमोटर की ओर से जीएसटी वापस नहीं किया जा सकता, तो आवंटी खुद रिफंड के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए सबसे पहले उसे अपने पैन कार्ड के आधार पर जीएसटी पोर्टल पर अस्थायी (Temporary) पंजीकरण कराना होगा।
इसके बाद “Refund for Unregistered Person” श्रेणी के अंतर्गत Form GST RFD-01 में आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ भुगतान का प्रमाण, आवश्यक दस्तावेज और प्रमोटर द्वारा जारी प्रमाण-पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा।
दस्तावेजों के सत्यापन के बाद संबंधित सक्षम अधिकारी लागू जीएसटी प्रावधानों के अनुसार पात्रता की जांच कर रिफंड स्वीकृत करेगा।
कब प्रमोटर लौटाएगा राशि और कब खुद करना होगा आवेदन
यूपी रेरा ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि अनुबंध निरस्त होने या समाप्त होने के समय तक प्रमोटर के पास क्रेडिट नोट जारी करने की वैधानिक समय-सीमा उपलब्ध है, तो वह स्वयं क्रेडिट नोट जारी करेगा या फिर जीएसटी सहित पूरी राशि खरीदार को वापस करेगा।
लेकिन यदि क्रेडिट नोट जारी करने की कानूनी अवधि समाप्त हो चुकी है, तभी आवंटी को खुद जीएसटी रिफंड के लिए आवेदन करना होगा।
दो साल के भीतर करना होगा दावा, 1000 रुपये से कम पर नहीं मिलेगा रिफंड
जीएसटी विभाग के अनुसार, अनुबंध समाप्त या निरस्त होने की तारीख से दो वर्ष के भीतर रिफंड का दावा किया जा सकता है। हालांकि, यदि जीएसटी की राशि 1,000 रुपये से कम है, तो ऐसे मामलों में रिफंड का दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
वेबसाइट पर उपलब्ध हैं सभी दिशा-निर्देश
यूपी रेरा ने रियल एस्टेट प्रमोटरों और रियल एस्टेट एजेंटों के लिए जारी सभी दिशा-निर्देश तथा राज्य कर विभाग का संबंधित पत्र अपनी आधिकारिक वेबसाइट के सर्कुलर अनुभाग में उपलब्ध कराया है, ताकि खरीदार और डेवलपर दोनों नियमों की स्पष्ट जानकारी प्राप्त कर सकें।
इस नए आदेश को घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल जीएसटी रिफंड को लेकर लंबे समय से बनी असमंजस की स्थिति दूर होगी, बल्कि रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही भी मजबूत होने की उम्मीद है।











