लखनऊ, 13 जुलाई। उत्तर प्रदेश में मानसून की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में ऐसा कोई मजबूत मौसम तंत्र सक्रिय नहीं है, जो व्यापक और प्रभावी बारिश करा सके। तराई क्षेत्र को छोड़कर अधिकांश जिलों में अगले तीन से चार दिनों तक अच्छी बारिश की संभावना बेहद कम है। ऐसे में लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलने के फिलहाल आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए प्रदेश के किसी भी जिले में भारी या प्रभावी बारिश की चेतावनी जारी नहीं की है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय पछुआ हवाओं का प्रभाव बना हुआ है, जिसकी वजह से मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ गई हैं। इसका असर न केवल मौसम पर दिखाई दे रहा है, बल्कि खेती-किसानी पर भी चिंता बढ़ने लगी है।
तराई के कुछ जिलों में ही हुई अच्छी बारिश
हालांकि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश थमी हुई है, लेकिन तराई के कुछ जिलों में सोमवार को अच्छी वर्षा दर्ज की गई। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार महराजगंज में 130 मिमी बारिश हुई, जो प्रदेश में सबसे अधिक रही। इसके अलावा गोरखपुर में 92 मिमी और श्रावस्ती में 54.6 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
इन जिलों को छोड़ दें तो प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में बादल तो आए, लेकिन राहत देने वाली बारिश नहीं हुई।
तेज धूप और उमस से बढ़ी परेशानी
बारिश में कमी आने के साथ ही कई जिलों में तेज धूप निकलने लगी है, जिससे तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दिन के समय गर्म हवाओं और नमी के कारण उमस का असर अधिक महसूस हो रहा है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक दिन और रात—दोनों के तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से जूझना पड़ेगा।
17 जुलाई के बाद बदल सकता है मौसम
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, अगले तीन से चार दिनों तक बारिश में ठहराव बना रहने की संभावना है। हालांकि कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम और छिटपुट बारिश हो सकती है, लेकिन व्यापक वर्षा के संकेत फिलहाल नहीं हैं।
उन्होंने बताया कि 17 जुलाई के बाद हवाओं का रुख फिर से पुरवा होने की संभावना बन रही है। यदि ऐसा होता है तो प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां दोबारा सक्रिय हो सकती हैं और कई जिलों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।
धान की खेती पर बढ़ी चिंता
बारिश का सिलसिला थमने से सबसे अधिक चिंता किसानों के बीच देखी जा रही है। जुलाई का महीना धान की रोपाई और शुरुआती वृद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यदि अगले कुछ दिनों तक पर्याप्त वर्षा नहीं होती है, तो इसका असर धान की फसल और अन्य खरीफ फसलों पर पड़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि समय पर बारिश नहीं होने से सिंचाई पर निर्भरता बढ़ेगी, जिससे किसानों की लागत में इजाफा हो सकता है।









