लखनऊ, 13 जुलाई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के दीक्षांत समारोह में चिकित्सा पेशे से जुड़े छात्रों और डॉक्टरों को संबोधित करते हुए कहा कि एक चिकित्सक की पहचान केवल उसकी दवा से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार से भी होती है। उन्होंने ‘वाइट कोट सिंड्रोम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि कई मरीज डॉक्टर को देखते ही घबराहट महसूस करने लगते हैं। ऐसे में डॉक्टरों का आत्मीय और संवेदनशील व्यवहार भी मरीज के उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि मरीज को मानसिक रूप से भी भरोसा देना है। डॉक्टर के शब्द, व्यवहार और अपनापन कई बार दवाइयों जितना ही असर छोड़ते हैं।
‘पेशेंट केयर’ के साथ ‘केयरिंग फॉर पेशेंट’ भी जरूरी
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने फ्रांसीसी दार्शनिक वाल्टेयर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “जीवन की रक्षा करना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना जीवन की रचना करना।” उन्होंने डॉक्टरों से आग्रह किया कि चिकित्सा सेवा केवल ‘पेशेंट केयर’ तक सीमित न रहे, बल्कि उसमें ‘केयरिंग फॉर पेशेंट’ की भावना भी दिखाई दे।
उन्होंने कहा कि जब मरीज अस्पताल पहुंचता है तो वह केवल इलाज ही नहीं, बल्कि भरोसा और संवेदनशीलता भी तलाशता है। इसलिए डॉक्टरों को अपने व्यवहार में ऐसी सकारात्मक ऊर्जा रखनी चाहिए, जिससे मरीज का आत्मविश्वास बढ़े।
केजीएमयू ने देश को दिए कई प्रतिष्ठित चिकित्सक
रक्षा मंत्री ने केजीएमयू की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान दशकों से देश को ऐसे चिकित्सक देता आया है, जिन्होंने चिकित्सा जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने डॉ. अवतार सिंह, डॉ. बलराम भार्गव और डॉ. नरेश त्रेहन का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी अपने-अपने क्षेत्र में स्वयं एक संस्थान के समान हैं और उन्होंने सेवा तथा समर्पण की मिसाल पेश की है।
रामचरितमानस से दिया चिकित्सा सेवा का संदेश
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में रामचरितमानस के उस प्रसंग का भी उल्लेख किया, जिसमें राजवैद्य सुषेण ने युद्ध के दौरान लक्ष्मण का उपचार करते समय यह नहीं देखा कि वह किस पक्ष से हैं। उन्होंने कहा कि एक चिकित्सक का धर्म केवल मरीज की जान बचाना होता है और यही चिकित्सा सेवा की सबसे बड़ी पहचान है।
उन्होंने प्रसिद्ध चिकित्सक सर विलियम हॉकिन्स का उल्लेख करते हुए कहा कि डॉक्टर यदि मरीज की बात ध्यान से सुनें, तो कई बार उसी में इलाज का रास्ता छिपा होता है। उन्होंने डॉक्टरों से आधुनिक चिकित्सा के साथ योग, ध्यान (मेडिटेशन) और मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देने की अपील की।
‘मरीज को भगवान मानकर सेवा करें’
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में लगातार नए मानक स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि मरीजों को बिना देरी उपचार मिले। इसी सोच के तहत ऐसी व्यवस्था लागू की गई है कि मरीज का इलाज पहले शुरू हो और पंजीकरण (पर्चा) की औपचारिकता बाद में पूरी की जाए।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि डॉक्टरों को मरीज को भगवान का स्वरूप मानकर सेवा करनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि केजीएमयू से निकलने वाले नए डॉक्टर चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा देकर संस्थान और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।








