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आधार आधारित रजिस्ट्री: उत्तर प्रदेश में 1 फरवरी से संपत्ति पंजीकरण की नई व्यवस्था लागू

On: January 30, 2026
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उत्तर प्रदेश में 1 फरवरी से संपत्ति पंजीकरण की नई व्यवस्था लागू
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लखनऊ, शुक्रवार 30 जनवरी 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने जमीन-जायदाद से जुड़े फर्जीवाड़े, बोगस रजिस्ट्रेशन और पहचान संबंधी विवादों पर निर्णायक प्रहार करते हुए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संपत्ति रजिस्ट्री के लिए आधार आधारित रजिस्ट्री प्रणाली लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह व्यवस्था 1 फरवरी 2026 से प्रदेश के सभी उप-निबंधक (Sub-Registrar) कार्यालयों में प्रभावी होगी।

सरकार का मानना है कि अब रजिस्ट्री प्रक्रिया में व्यक्ति की पहचान कागजी औपचारिकताओं से आगे बढ़कर तकनीकी और जैविक सत्यापन (Biometric Verification) के स्तर पर स्थापित होगी, जिससे फर्जी पहचान के जरिए जमीन की खरीद-फरोख्त पर लगाम लगेगी।

ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक और ई-हस्ताक्षर से होगी पहचान की पुष्टि

स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने जानकारी दी कि यह निर्णय 28 अगस्त 2024 को मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में लिया गया था। उसी के तहत अगस्त 2024 में जारी अधिसूचना द्वारा UP ऑनलाइन दस्तावेज पंजीकरण नियम, 2024 लागू किए गए।

नई व्यवस्था के अनुसार, रजिस्ट्री के दौरान:

  • निष्पादक (Executant)
  • पक्षकार (Parties)
  • गवाह (Witnesses)

सभी की पहचान आधार ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और ई-हस्ताक्षर के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से सत्यापित की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि इससे “डमी व्यक्ति”, “फर्जी गवाह” और “जाली पहचान” जैसे पुराने हथकंडों पर रोक लगेगी और रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।

जमीन घोटालों पर लगेगी रोक, बढ़ेगा भरोसा

प्रदेश में बीते वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए, जहां असली मालिक की जानकारी के बिना फर्जी दस्तावेजों के सहारे संपत्ति का पंजीकरण करा लिया गया। कागजी पहचान की सीमाओं का लाभ उठाकर दलाल और भू-माफिया ऐसे मामलों को अंजाम देते रहे हैं।

आधार आधारित रजिस्ट्री लागू होने के बाद अब किसी भी व्यक्ति के लिए गलत पहचान के साथ रजिस्ट्री कराना लगभग असंभव हो जाएगा, क्योंकि पहचान सीधे UIDAI के डेटाबेस से सत्यापित होगी।

पुराने दस्तावेजों का डिजिटलाइजेशन: छह माह का अतिरिक्त समय

कैबिनेट ने एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत वर्ष 2002 से 2017 तक पंजीकृत संपत्ति दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन के लिए चल रही स्कैनिंग एवं इंडेक्सिंग परियोजना को पूरा करने हेतु छह माह का अतिरिक्त समय दिया गया है।

यह परियोजना वर्ष 2022 में 95 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई थी। कार्य में व्यावहारिक देरी के कारण जुलाई 2024 में इसकी लागत बढ़ाकर 123.62 करोड़ रुपये कर दी गई।

अब तक की प्रगति:

  • इंडेक्सिंग कार्य: 99.11% पूरा
  • स्कैनिंग कार्य: 98.37% पूरा

इन जिलों में अभी बाकी है काम

हालांकि अधिकांश जिलों में डिजिटलाइजेशन का काम पूरा हो चुका है, लेकिन कुछ जिलों में अभी कार्य शेष है:

एटा, वाराणसी, मुरादाबाद, मैनपुरी, लखनऊ, अलीगढ़, हाथरस, आगरा, सहारनपुर और प्रयागराज

मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि अगले छह महीनों में इन जिलों में भी काम पूरा कर लिया जाएगा। हर दस्तावेज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए दो स्तरों पर सत्यापन किया जा रहा है।

सुरक्षित होंगे जमीन-जायदाद के रिकॉर्ड

पुराने दस्तावेजों के डिजिटल रूप में सुरक्षित होने से:

  • रिकॉर्ड खोने का खतरा कम होगा
  • फर्जी कागजात तैयार करना मुश्किल होगा
  • संपत्ति विवादों के निपटारे में तेजी आएगी
  • आम नागरिक को अपने दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेंगे

पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित रजिस्ट्री की ओर कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि आधार आधारित रजिस्ट्री सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि संपत्ति प्रबंधन प्रणाली में विश्वास बहाली का बड़ा कदम है। इससे न केवल जमीन घोटालों पर रोक लगेगी, बल्कि रजिस्ट्री कार्यालयों में दलाली और कागजी हेरफेर की गुंजाइश भी कम होगी।

उत्तर प्रदेश अब उन राज्यों की कतार में शामिल हो गया है, जहां संपत्ति पंजीकरण पूरी तरह डिजिटल सत्यापन की ओर बढ़ रहा है। 1 फरवरी से लागू होने वाली यह व्यवस्था आने वाले समय में रजिस्ट्री की परिभाषा ही बदल सकती है।

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