लखनऊ/03 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को तेज करने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक सोलर आवर्स (Solar Hours EV Charging) के दौरान इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज कराने पर उपभोक्ताओं को टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस पहल से सौर ऊर्जा का बेहतर उपयोग होगा, चार्जिंग की लागत घटेगी और हरित परिवहन को नई गति मिलेगी।
ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल ईवी चार्जिंग को सस्ता बनाना नहीं है, बल्कि दिन के समय उपलब्ध सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना भी है। इससे पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा संतुलन, दोनों को मजबूती मिलेगी।
सोलर आवर्स के दौरान ईवी चार्जिंग पर 20% टैरिफ छूट से क्या होगा फायदा?
प्रदेश सरकार के अनुसार सार्वजनिक ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित सोलर आवर्स में चार्जिंग कराने वाले उपभोक्ताओं को बिजली टैरिफ में 20 प्रतिशत की राहत देने का निर्णय लिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिन के समय सौर ऊर्जा का उत्पादन सबसे अधिक रहता है। ऐसे में यदि अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन इसी अवधि में चार्ज होंगे तो ग्रिड पर दबाव भी संतुलित रहेगा और स्वच्छ ऊर्जा का बेहतर उपयोग संभव होगा। इससे चार्जिंग ऑपरेटरों और ईवी उपभोक्ताओं दोनों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
लगातार सातवें साल नहीं बढ़ीं बिजली दरें
योगी सरकार ने प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को एक और राहत देते हुए लगातार सातवें वर्ष भी बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। घरेलू, कृषि, व्यावसायिक और अन्य सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए मौजूदा टैरिफ को यथावत रखा गया है।
सरकार का कहना है कि प्रत्येक उपभोक्ता तक सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली पहुंचाना उसकी प्राथमिकता है। यही वजह है कि महंगाई के दौर में भी बिजली दरों को स्थिर रखते हुए आम लोगों को राहत देने का प्रयास जारी है।
32,673 मेगावाट बिजली मांग पूरी कर उत्तर प्रदेश ने बनाया नया रिकॉर्ड
ऊर्जा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। प्रदेश ने 32,673 मेगावाट की अब तक की सर्वाधिक बिजली मांग को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज किया है।
सरकार के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत करने और वितरण व्यवस्था में सुधार का सीधा असर अब दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि रिकॉर्ड मांग के बावजूद प्रदेश में बिजली आपूर्ति सुचारु बनी रही।
सौर ऊर्जा और तापीय परियोजनाओं पर तेजी से बढ़ रहा काम
ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि पहले प्रदेश में तापीय विद्युत उत्पादन लगभग 5,180 मेगावाट तक सीमित था, जबकि अब केवल सौर ऊर्जा से ही इससे अधिक क्षमता विकसित की जा रही है।
उन्होंने बताया कि करीब 4,000 मेगावाट क्षमता के सोलर पार्क विकसित किए जा रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत लगभग 2,500 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता तैयार करने का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इसके अलावा मिर्जापुर, मेजा सहित विभिन्न क्षेत्रों में तापीय विद्युत परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है। पुराने तापीय बिजलीघरों की कार्यक्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जहां पहले ये संयंत्र लगभग 65 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर पर संचालित होते थे, वहीं अब उनकी दक्षता बढ़कर करीब 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ते कदम
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि प्रदेश की उपलब्धियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू की गई ऊर्जा नीतियों का परिणाम हैं। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में ऊर्जा उत्पादन, हरित ऊर्जा और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।
सरकार का मानना है कि Solar Hours EV Charging जैसी पहलें न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देंगी, बल्कि ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।









