नई दिल्ली/30 जुलाई 2026: संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को वंदे मातरम् बिल लोकसभा से भी पारित हो गया। इससे एक दिन पहले राज्यसभा इस विधेयक को अपनी मंजूरी दे चुकी थी। विपक्ष के तीखे विरोध और सदन में हुए हंगामे के बावजूद सरकार ने बिल को दोनों सदनों से पारित करा लिया। अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून के रूप में लागू हो जाएगा।
इससे पहले केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 24 जुलाई को राज्यसभा में यह विधेयक पेश किया था। सरकार का कहना है कि स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की गरिमा और सम्मान की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कानून आवश्यक है।
राष्ट्रीय गीत के अपमान पर होगी सख्त कार्रवाई
विधेयक कानून बनने के बाद राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को भी कानूनी संरक्षण मिलेगा, जैसा संरक्षण वर्तमान में राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ को प्राप्त है। नए प्रावधानों के तहत राष्ट्रीय गीत का अपमान करना दंडनीय अपराध माना जाएगा।
कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति वंदे मातरम् गाए जाने के दौरान जानबूझकर बाधा उत्पन्न करता है, किसी को इसे गाने से रोकता है या इसके सम्मान को ठेस पहुंचाने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। ऐसे मामलों में तीन वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान रखा गया है। यही दंड राष्ट्रगान के अपमान से जुड़े मामलों में भी लागू है।
आधिकारिक कार्यक्रमों में पहले गाया जाएगा राष्ट्रीय गीत
विधेयक में राष्ट्रीय गीत के सभी छह छंदों का उल्लेख भी किया गया है। इसके साथ ही गृह मंत्रालय के उस निर्देश को भी आधार बनाया गया है, जिसमें राज्यों से कहा गया था कि जिन सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान बजाया जाता है, वहां राष्ट्रीय गीत को भी शामिल किया जाए।
निर्देश के अनुसार यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान दोनों प्रस्तुत किए जाएं, तो पहले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ गाया या बजाया जाएगा। साथ ही इसे गाते या सुनते समय सभी लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़ा रहना होगा।
लोकसभा की कार्यवाही शुक्रवार तक स्थगित
लोकसभा में वंदे मातरम् बिल पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। अब लोकसभा की अगली बैठक शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को होगी।
विधेयक के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब देश की नजर राष्ट्रपति की मंजूरी पर है। स्वीकृति मिलते ही राष्ट्रीय गीत के सम्मान और संरक्षण से जुड़े नए कानूनी प्रावधान पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगे।












