लखनऊ (13 मई 2026)। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बचत, स्वदेशी और ऊर्जा संरक्षण को लेकर बड़ा अभियान छेड़ने के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि आने वाला समय सतर्कता, आत्मनिर्भरता और जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने का है।
इसी क्रम में उन्होंने सरकारी तंत्र से लेकर आम नागरिकों तक के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने बड़े संस्थानों और स्टार्टअप्स में Work From Home संस्कृति को बढ़ावा देने की बात कही। इसके साथ ही मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को भी सार्वजनिक परिवहन अपनाने और ईंधन बचत अभियान से जुड़ने का संदेश दिया गया।
Work From Home को बढ़ावा देने पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को मुख्य सचिव एसपी गोयल, डीजीपी राजीव कृष्ण और सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में कहा कि जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां सप्ताह में कम से कम दो दिन Work From Home लागू करने की दिशा में एडवाइजरी जारी की जाए।
उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के इस दौर में कई बैठकें, कार्यशालाएं और सेमिनार ऑनलाइन माध्यम से आसानी से आयोजित किए जा सकते हैं। इससे न सिर्फ ईंधन की बचत होगी, बल्कि ट्रैफिक दबाव और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
शिक्षा विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि अधिकतम मीटिंग्स और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट किया जाए। मुख्यमंत्री का मानना है कि यह कदम आने वाले समय में प्रशासनिक खर्च कम करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद करेगा।
मंत्री, सांसद और विधायकों को क्या निर्देश दिए गए?
मुख्यमंत्री ने मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें। उन्होंने “नो व्हीकल डे” मनाने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे आम लोगों में भी सकारात्मक संदेश जाएगा।
योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की फ्लीट में 50 प्रतिशत तक कटौती करने का निर्देश भी दिया। उन्होंने कहा कि काफिलों में शामिल अनावश्यक वाहनों को हटाया जाए और सरकारी संसाधनों का उपयोग बेहद जरूरत के अनुसार किया जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संदेश केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक भी है। सरकार आम जनता को यह दिखाना चाहती है कि बचत और संयम की शुरुआत सत्ता और प्रशासन से ही होनी चाहिए।
ईंधन बचत और स्वदेशी अभियान पर जोर
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल की खपत कम करना समय की जरूरत है। उन्होंने मेट्रो, इलेक्ट्रिक वाहनों, पीएनजी, कार पूलिंग और रोडवेज बसों के ज्यादा उपयोग पर बल दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि अनावश्यक सोने की खरीदारी से बचना चाहिए और त्योहारों व शादियों में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने ODOP और GI टैग वाले उत्पादों को सरकारी उपहारों में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
बिजली बचत और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा
मुख्यमंत्री योगी ने बिजली बचत को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिए कि सरकारी भवनों, निजी प्रतिष्ठानों और घरों में अनावश्यक बिजली खर्च न किया जाए। व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में रात 10 बजे के बाद सजावटी रोशनी का सीमित उपयोग करने को कहा गया है।
इसके साथ ही उन्होंने अगले छह महीने तक गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के धार्मिक, सांस्कृतिक, ईको और ग्रामीण पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है।
योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को व्यापारिक संगठनों, होटल कारोबारियों, ज्वेलर्स और स्थानीय संस्थाओं के साथ मिलकर जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय हित से जुड़ा व्यापक जन आंदोलन है।









