नई दिल्ली/13 अगस्त 2026: संसद के मानसून सत्र का आखिरी दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी टकराव की भेंट चढ़ गया। लोकसभा में गुरुवार को कामकाज शुरू होते ही राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन हुआ और इसके तुरंत बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। यानी आखिरी दिन लोकसभा में विधायी कामकाज के लिए सदन की बैठक आगे नहीं बढ़ सकी।
राज्यसभा में स्थिति कुछ अलग रही। वहां विपक्षी सांसदों के हंगामे के बीच सरकार ने खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कराया। इसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
मानसून सत्र के आखिरी दिन लोकसभा में क्या हुआ?
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान में खड़े होने का आग्रह किया। सदन में गीत का पूर्ण गायन हुआ। इसके बाद अध्यक्ष ने लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।
इस तरह मानसून सत्र के आखिरी दिन लोकसभा में कोई विधायी कामकाज नहीं हो सका। सत्र के दौरान पहले से चले आ रहे राजनीतिक गतिरोध का असर अंतिम दिन भी दिखाई दिया।
लोकसभा स्थगित होने के बाद भी संसद परिसर में विपक्ष का विरोध जारी रहा। समाजवादी पार्टी के सांसदों ने राम मंदिर में कथित चंदा चोरी के मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ सांसदों ने कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर जाने का फैसला किया है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि अब भगवान हनुमान ही भगवान राम के चंदे की सुरक्षा कर सकते हैं।
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी सरकार पर संसद चलाने में असफल रहने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि सदन तभी सुचारु रूप से चलता है, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष बातचीत करके कामकाज का रास्ता निकालें। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की सदन में मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए।
विपक्ष का विरोध क्यों रहा जारी?
पूरे मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। इनमें जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर से जुड़े चंदे का विवाद, नीट पेपर लीक और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
इन विषयों पर चर्चा की मांग को लेकर दोनों सदनों में कई बार हंगामा हुआ। नतीजा यह रहा कि संसद के कामकाज पर भी इसका असर पड़ा और कई मौकों पर कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
हालांकि सरकार की ओर से विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रहा। यही वजह है कि आखिरी दिन लोकसभा में कामकाज नहीं होने के बावजूद राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित हो गया।
राज्यसभा में क्या हुआ?
राज्यसभा में भी विपक्ष के विरोध और नारेबाजी का सिलसिला देखने को मिला। इसके बीच सरकार ने खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को सदन से पारित करा लिया। इसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी की एक घटना का मुद्दा उठाया। खरगे के मुताबिक, उनके 8 अगस्त के कार्यक्रम के बाद कार्यक्रम स्थल पर कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ के लिए हवन किया गया। उन्होंने इसे लेकर चिंता जताई और कहा कि ऐसी घटनाएं लोकतांत्रिक और सामाजिक माहौल के लिए ठीक नहीं हैं।
इस पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसी किसी गतिविधि का समर्थन नहीं करती और मामले की जांच की जाएगी। मुद्दे को लेकर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।
राज्यसभा में कितना हुआ काम?
मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में कुल 37 घंटे 49 मिनट कामकाज हुआ। इस दौरान सदन ने 12 विधेयकों पर विचार किया और उन्हें पारित किया या संबंधित संसदीय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया।
सत्र की उत्पादकता भी व्यवधानों से प्रभावित रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्यसभा की उत्पादकता करीब 39.17 प्रतिशत रही।
आखिरी दिन खान और खनिज संशोधन विधेयक का पारित होना इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि विपक्ष के हंगामे के बावजूद सरकार अपना विधायी कामकाज पूरा कराने में सफल रही।
लोकसभा में कितने विधेयक हुए पारित?
लोकसभा में भी पूरे सत्र के दौरान कई विधेयक पेश और पारित किए गए। इनमें सुप्रीम कोर्ट संशोधन विधेयक, 2026, सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026, जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक तथा केरल का नाम बदलने से संबंधित विधेयक जैसे प्रस्ताव शामिल रहे।
हालांकि, कामकाज का बड़ा हिस्सा लगातार हुए व्यवधानों से प्रभावित रहा। रिपोर्टों के अनुसार लोकसभा की उत्पादकता करीब 19 प्रतिशत रही।
25 दिन का सत्र, लेकिन हंगामा रहा हावी
संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई को शुरू हुआ और 13 अगस्त को समाप्त हुआ। पूरे सत्र की तस्वीर देखें तो सत्ता पक्ष ने विधायी कामकाज को आगे बढ़ाने पर जोर दिया, जबकि विपक्ष ने उन मुद्दों पर चर्चा की मांग की जिन्हें वह जनहित से जुड़ा और गंभीर मानता रहा।
संसदीय लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन जब राजनीतिक टकराव लगातार सदन की कार्यवाही को प्रभावित करने लगे तो उसका सीधा असर विधायी चर्चा पर पड़ता है। इस सत्र में भी यही तस्वीर काफी हद तक देखने को मिली।
आखिरकार, आखिरी दिन लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ के साथ कार्यवाही समाप्त हुई और राज्यसभा में हंगामे के बीच महत्वपूर्ण विधेयक पारित होने के बाद सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।












