लखनऊ/23 अगस्त 2026: लखनऊ में रविवार को आयोजित राज्य स्तरीय रसोइया सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिड-डे मील रसोइयों के लिए एक साथ चार बड़ी सौगातों का ऐलान किया। रक्षाबंधन से ठीक पहले लिए गए इन फैसलों से प्रदेश के करीब 3.53 लाख से अधिक रसोइयों को सीधा लाभ मिलेगा। सरकार ने मानदेय बढ़ाने के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा, मातृत्व अवकाश और परिधान से जुड़ी सहायता में भी बदलाव किया है।
मिड-डे मील रसोइयों का मानदेय अब 3,000 रुपये
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले रसोइयों को हर महीने महज 1,000 रुपये का मानदेय मिलता था। सरकार ने इसे पहले बढ़ाकर 1,500 और फिर 2,000 रुपये किया। अब इसमें एक हजार रुपये की और बढ़ोतरी करते हुए मानदेय 3,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।
सरकार के इस फैसले का आर्थिक असर प्रदेशभर में पीएम पोषण योजना के तहत काम कर रहे हजारों रसोइयों पर पड़ेगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बढ़ा हुआ मानदेय सितंबर 2026 से लागू होगा और इसका भुगतान अक्टूबर में किए जाने की व्यवस्था है।
5 लाख रुपये तक मिलेगा कैशलेस इलाज
सरकार ने मिड-डे मील रसोइयों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा का प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में लाभार्थियों को कैशलेस चिकित्सा कार्ड भी वितरित किए।
इसके साथ दुर्घटना की स्थिति में 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान भी किया गया है। सरकार का कहना है कि इस कदम से अब तक सामाजिक सुरक्षा के सीमित दायरे में रहने वाले रसोइयों और उनके परिवारों को अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी।
महिला रसोइयों के लिए मातृत्व अवकाश में राहत
योगी सरकार ने महिला रसोइयों के लिए मातृत्व अवकाश से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। इसके तहत पहले लागू बच्चों की उम्र के अंतर से संबंधित बाध्यता को समाप्त किया गया है। इसका उद्देश्य महिला रसोइयों को मातृत्व के दौरान ज्यादा सहज और व्यावहारिक सुविधा देना है।
सरकार ने रसोइयों को ‘पोषण प्रहरी’ के रूप में सम्मान देने की पहल भी की है। इसके अलावा परिधान के लिए मिलने वाली सहायता राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। ताजा घोषणा के अनुसार यह राशि 500 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये की गई है।
भोजन की गुणवत्ता से समझौता न करने की हिदायत
समारोह में मुख्यमंत्री ने रसोइयों की जिम्मेदारी को केवल भोजन पकाने तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि स्कूलों में बच्चों को मिलने वाला भोजन सीधे उनके स्वास्थ्य और शारीरिक विकास से जुड़ा है।
योगी ने रसोइयों से निर्धारित मेन्यू के अनुसार पौष्टिक भोजन तैयार करने और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की अपील की। साथ ही उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि विद्यालय की रसोई में किसी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए। फूड प्वाइजनिंग जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
डीबीटी से सीधे खातों में पहुंच रहा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचने में बिचौलियों और भ्रष्टाचार की समस्या सामने आती थी। अब व्यवस्था में बदलाव करते हुए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के माध्यम से लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में भी पिछले वर्षों में कई बदलाव किए गए हैं। सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जिसमें योजना का लाभ वास्तविक लाभार्थी तक सीधे पहुंचे।
स्कूलों की तस्वीर बदलने का किया दावा
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग सरकारी विद्यालयों की पुरानी और जर्जर तस्वीरों के जरिए नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के आसपास सरकारी स्कूलों की स्थिति अलग थी, लेकिन कायाकल्प अभियान के बाद विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं और वातावरण में बदलाव आया है।
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों के बच्चों के लिए बनाए गए अटल आवासीय विद्यालयों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों को मॉडल के तौर पर विकसित किया जा रहा है। साथ ही हर मंडल में कंपोजिट विद्यालय विकसित करने की दिशा में भी काम जारी है।
समारोह में 11 रसोइये सम्मानित, जिलों में भी हुए कार्यक्रम
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में 11 रसोइयों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में करीब 1,500 रसोइये शामिल हुए। इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न जिलों और तहसील स्तर पर भी रसोइया सम्मान समारोह आयोजित किए गए।
मुख्यमंत्री का संदेश साफ था—स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाले रसोइये पीएम पोषण योजना की जमीनी कड़ी हैं। उनके मानदेय में बढ़ोतरी और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी सुविधाएं इसी भूमिका को सामाजिक सम्मान और सुरक्षा देने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखी जा रही हैं।









