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‘पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक टेक्नोलॉजी से जोड़कर पैदा होंगे रोजगार के नए अवसर’, गोरखपुर में बोले CM योगी

On: August 28, 2026
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टेक्नोलॉजी से जोड़कर पैदा होंगे रोजगार के नए अवसर, गोरखपुर में बोले CM योगी
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गोरखपुर/28 अगस्त 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी पारंपरिक ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान, रिसर्च और टेक्नोलॉजी से जोड़कर रोजगार और आर्थिक विकास की नई राह तैयार की जा सकती है। उन्होंने आयुर्वेद को आधुनिक डायग्नोस्टिक और क्लीनिकल रिसर्च, औषधीय पौधों को आधुनिक कृषि व बायोटेक्नोलॉजी और योग को प्रिवेंटिव हेल्थकेयर से जोड़ने की जरूरत बताई।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के पांचवें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक कसौटी पर विकसित करने से न केवल भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि नई अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

पारंपरिक ज्ञान परंपरा और आधुनिक टेक्नोलॉजी का संगम जरूरी

सीएम योगी ने कहा कि आने वाले समय में केवल पुरानी ज्ञान परंपराओं को संरक्षित करना पर्याप्त नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि उनके व्यावहारिक पक्ष को आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ जोड़ा जाए।

उन्होंने आयुर्वेद का उदाहरण देते हुए कहा कि इसे आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीक और क्लीनिकल रिसर्च से जोड़ा जा सकता है। इसी तरह मेडिसिनल प्लांट की खेती को आधुनिक कृषि और बायोटेक्नोलॉजी से जोड़कर किसानों के लिए नए अवसर बनाए जा सकते हैं। योग को प्रिवेंटिव हेल्थकेयर के साथ जोड़ने से स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी व्यापक संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

यही वह बिंदु है जहां परंपरा और आधुनिकता एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि पूरक बन सकती हैं। मुख्यमंत्री ने इसी तालमेल को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया।

डिग्री नहीं, अवसर पैदा करने वाले युवा तैयार करे शिक्षा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं होना चाहिए। विश्वविद्यालयों को ऐसे युवाओं को तैयार करना होगा, जो अपने ज्ञान और कौशल के दम पर खुद अवसर पैदा कर सकें।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें केवल जॉब रेडी नहीं, बल्कि फ्यूचर रेडी बनना होगा। इसके लिए इनोवेटर, इंटरप्रेन्योर और प्रॉब्लम साल्वर बनने की क्षमता विकसित करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय की बड़ी चुनौतियों का समाधान किसी एक विषय की सीमा में संभव नहीं होगा। इसके लिए अलग-अलग ज्ञान विधाओं को एक साथ लाने की जरूरत होगी।

मेडिकल से कृषि तक बने इंटीग्रेटेड इनोवेशन इकोसिस्टम

सीएम योगी ने मेडिकल, नर्सिंग, फार्मेसी, कृषि और दूसरी विधाओं को अलग-अलग धाराओं के रूप में देखने के बजाय एकीकृत ज्ञान और इनोवेशन इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि एआई आधारित डायग्नोसिस, टेलीमेडिसिन, बायोटेक्नोलॉजी, प्रिसिजन फार्मिंग, ड्रोन तकनीक, स्मार्ट इरिगेशन और एग्री प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में विश्वविद्यालय बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

इन तकनीकों का महत्व केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है। सही दिशा में काम हो तो इनका सीधा फायदा अस्पतालों, किसानों, युवाओं और स्थानीय उद्योगों तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि विश्वविद्यालयों को शिक्षा के साथ शोध और नवाचार का केंद्र बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

ज्ञान से इनोवेशन और इनोवेशन से रोजगार तक की यात्रा

मुख्यमंत्री ने सरकार, विश्वविद्यालय, उद्योग और युवाओं के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि ऐसा इकोसिस्टम तैयार होना चाहिए, जिसमें ज्ञान से इनोवेशन, इनोवेशन से उद्यम, उद्यम से रोजगार और रोजगार से आर्थिक विकास की यात्रा आगे बढ़े।

उन्होंने गोरखपुर को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और इनोवेशन के बड़े क्षेत्रीय ज्ञान एवं आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावना भी जताई। इसके लिए स्थानीय स्तर पर मौजूद संसाधनों, संस्थानों और प्रतिभाओं को एक-दूसरे से जोड़ना अहम होगा।

पांच साल पूरे होने पर विश्वविद्यालय परिवार को दी बधाई

महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के पांचवें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय परिवार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की असली सफलता केवल परिसर में होने वाले शोध और अकादमिक गतिविधियों से नहीं मापी जानी चाहिए।

उन्होंने जोर दिया कि परिसर में पैदा होने वाला ज्ञान गांवों, किसानों, अस्पतालों, उद्योगों और युवा उद्यमियों तक पहुंचना चाहिए। जब शिक्षा और शोध का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंचेगा, तभी विश्वविद्यालय समाज की ताकत और देश की आर्थिक प्रगति का प्रभावी माध्यम बन सकेगा।

मुख्यमंत्री के संबोधन का मूल संदेश यही रहा कि भारत की पुरानी ज्ञान परंपरा को अतीत की धरोहर बनाकर रखने के बजाय उसे आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ जोड़कर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढाला जाए। इससे ज्ञान का विस्तार तो होगा ही, युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।

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