मथुरा/गुरुवार, 3 सितंबर 2026: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर वृंदावन पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह का लोकार्पण किया। ब्रज की कला, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को समर्पित इस आयोजन में संतों का सम्मान हुआ, नन्हे बच्चों का अन्नप्राशन कराया गया और कलाकारों ने राधा-कृष्ण की लीलाओं के साथ गरबा व मयूर नृत्य की प्रस्तुतियां दीं।
समारोह को संबोधित करते हुए सीएम योगी वृंदावन से ब्रज की सनातन परंपरा और उसकी सांस्कृतिक स्मृति पर विस्तार से बोले। उन्होंने मथुरा के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने मंदिर तोड़े, लेकिन क्या वे श्रीकृष्ण की स्मृति को मिटा पाए? राधारानी की स्मृति मिटा पाए? क्या जन्माष्टमी का आयोजन रुक गया या बरसाना की होली और गोवर्धन की परिक्रमा थम गई? उन्होंने कहा, “नहीं। यही हमारा सनातन है और यही ब्रज की शक्ति है।”
सीएम योगी वृंदावन से बोले- विरासत से जुड़कर ही बनेगा विकसित राष्ट्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी राष्ट्र केवल आर्थिक उपलब्धियों से महान नहीं बनता। उसकी पहचान उसकी स्मृति, संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़ाव से भी तय होती है। उन्होंने कहा कि जिस समाज को अपनी जड़ों का ज्ञान नहीं होता, वह आधुनिकता को भी दूसरों की नकल के रूप में देखने लगता है। इसके विपरीत, अपनी विरासत का बोध रखने वाला समाज दुनिया से सीखता भी है और दुनिया को बहुत कुछ सिखाता भी है।
उन्होंने कहा कि विरासत की चर्चा करते समय इतिहास की ओर देखना जरूरी है। यह केवल उपलब्धियों का इतिहास नहीं, बल्कि संघर्ष, संरक्षण और पुनर्निर्माण का भी इतिहास है। मथुरा को इसका सबसे बड़ा उदाहरण बताते हुए मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थित केशवदेव मंदिर के इतिहास का उल्लेख किया।
योगी ने कहा कि मथुरा ने अनेक आक्रमण सहे, लेकिन आस्था की परंपरा नहीं टूटी। उनके मुताबिक मंदिरों पर हमले हुए, मगर श्रीकृष्ण की स्मृति लोगों के मन से नहीं मिटाई जा सकी।
स्वामी हरिदास की साधना और संगीत परंपरा को किया याद
स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह के लोकार्पण को मुख्यमंत्री ने ब्रज की सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी हरिदास महाराज ने भक्ति को संगीत का स्वरूप दिया और संगीत को आध्यात्मिक साधना का माध्यम बनाया।
मुख्यमंत्री के मुताबिक स्वामी हरिदास की संगीत साधना का प्रभाव इतना व्यापक था कि उसने एक सम्राट तक को भक्ति की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि ब्रज की कला, संगीत और आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाना केवल सांस्कृतिक संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी है।
1,051 करोड़ की 229 विकास परियोजनाओं का जिक्र
मथुरा में मुख्यमंत्री ने 1,051 करोड़ रुपये की लागत वाली 229 विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास समारोह को भी संबोधित किया। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर ब्रज की धरती से प्रदेशवासियों को पर्व की शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा कि स्वामी हरिदास की स्मृति में प्रेक्षागृह का लोकार्पण संतों और श्रीकृष्ण-राधारानी के अनुयायियों की उपस्थिति में होना अपने आप में विशेष अवसर है। मुख्यमंत्री ने आयोजन से जुड़े लोगों को बधाई भी दी।
वहीं पूर्व मंत्री और विधायक श्रीकांत शर्मा ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए ब्रज में हो रहे विकास कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले क्षेत्र की स्थिति जर्जर थी, जबकि केंद्र में नरेंद्र मोदी और प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ब्रज का कायाकल्प हुआ है।
उन्होंने बताया कि मथुरा के यमुना में गिरने वाले 36 नालों में से 32 को बंद किया जा चुका है और शेष चार नालों को भी अक्टूबर तक बंद करने का लक्ष्य है। सूरदास ब्रजभाषा अकादमी की स्थापना तथा ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग पर पड़ाव स्थलों के विकास कार्यों का भी उन्होंने उल्लेख किया।
दुनिया भर के कलाकारों के लिए मंच बनेगा प्रेक्षागृह
सांसद हेमा मालिनी ने ‘राधे-राधे’ के संबोधन के साथ प्रेक्षागृह का स्वागत किया। उन्होंने इसे ब्रज की कला, संगीत, नृत्य और साहित्य का जीवंत केंद्र बताया।
हेमा मालिनी ने कहा कि यह मंच स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देगा और भविष्य में दुनिया के विभिन्न हिस्सों से कलाकार यहां आकर अपनी प्रस्तुतियां दे सकेंगे। उनके अनुसार, यह केंद्र ब्रज की महान सांस्कृतिक परंपरा और ब्रजभाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री संदीप सिंह, विधायक पूरन प्रकाश, राजेश चौधरी, ठाकुर मेघश्याम, संत विजय कौशल महाराज, ओमप्रकाश सिंह, योगेश नौहवार और उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजा कांत मिश्र सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
321 सपेरा समाज के लाभार्थियों को भवन आवंटन पत्र
लोकार्पण कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में सजे नन्हे बच्चों का अन्नप्राशन कराया और उन्हें उपहार भेंट किए। इसके साथ ही ब्रज के प्रमुख संतों फूलडोल बिहारी दास महाराज, महंत सुतीक्ष्ण दास, महंत सनतकुमार शरण महाराज, स्वामी रामदेवानंद सरस्वती और संत बलराम दास का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम में 321 सपेरा समाज के लाभार्थियों को भवन आवंटन पत्र भी दिए गए। यह आयोजन धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ सामाजिक योजनाओं और विकास कार्यों के मंच के रूप में भी सामने आया।
विकास के साथ विरासत के सम्मान पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लंबे समय तक विकास को सड़कों, बिजली, पानी, भवन और उद्योगों तक सीमित करके देखने की कोशिश हुई। इस प्रक्रिया में कई बार विरासत की उपेक्षा हुई और इतिहास के नायकों को विस्मृति में धकेलने के प्रयास किए गए।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अब विकास की अवधारणा में सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को भी महत्व दिया जा रहा है। ब्रज के संदर्भ में उन्होंने परिक्रमा मार्गों, धार्मिक स्थलों और पर्यटन सुविधाओं के विकास का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था बेहतर होने से धार्मिक आयोजन अधिक व्यवस्थित तरीके से हो रहे हैं। उनके अनुसार पर्यटक तभी आते हैं जब उन्हें सुरक्षा महसूस होती है और व्यापारी तभी निवेश करते हैं जब उन्हें सुरक्षित माहौल का भरोसा हो।
यूपी में पर्यटन बढ़ने का भी किया दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश में 156 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ। उन्होंने इसे बेहतर कनेक्टिविटी, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे से जोड़ते हुए कहा कि सुरक्षा का भरोसा पर्यटन और निवेश, दोनों के लिए जरूरी है।
उन्होंने महाकुंभ का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने भाग लिया। ब्रज क्षेत्र में भी चौरासी कोसी, पंचकोसी और अन्य परिक्रमा मार्गों के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मथुरा-वृंदावन में रोपवे और मेगा पार्किंग जैसी परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री का संदेश साफ था कि ब्रज के विकास को केवल आधुनिक सुविधाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा। सड़क, पार्किंग, रोपवे और पर्यटन सुविधाओं के साथ यहां की कला, भाषा, संगीत, संत परंपरा और धार्मिक स्मृतियों को भी विकास की धारा में शामिल किया जाएगा। वृंदावन में स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह का लोकार्पण इसी सोच का एक प्रतीक बताया गया।










