गुवाहाटी, रविवार, 6 सितंबर 2026। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि उच्च शिक्षण संस्थानों का उद्देश्य केवल छात्रों को रोजगार और बेहतर करियर के लिए तैयार करना नहीं होना चाहिए। संस्थानों को ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करने पर भी जोर देना चाहिए, जो लोकतंत्र, समाज और राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान दे सकें।
असम की अपनी पहली यात्रा पर पहुंचे उपराष्ट्रपति ने रविवार को गीतानगर कॉलेज के स्वर्ण जयंती समारोह में उच्च शिक्षा की भूमिका पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान विकसित भारत के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण आधार हैं। इन संस्थानों के माध्यम से ऐसा कुशल और जिम्मेदार कार्यबल तैयार किया जा सकता है, जो देश की विकास यात्रा को गति देने में योगदान दे।
शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ करियर तक सीमित नहीं
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि उच्च शिक्षा के साथ छात्रों में लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान के प्रति सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ऐसे नागरिक तैयार करना है, जो अपने व्यक्तिगत विकास के साथ समाज के प्रति भी अपनी जिम्मेदारियों को समझें।
उन्होंने कहा कि किसी शैक्षणिक संस्थान की सफलता केवल उसकी इमारतों, सुविधाओं या बुनियादी ढांचे से नहीं आंकी जा सकती। उसकी वास्तविक उपलब्धि उसके छात्रों की सफलता और उनके व्यक्तित्व में दिखाई देती है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा छात्रों में उत्कृष्टता की भावना विकसित करती है, जबकि बुनियादी ढांचा केवल आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का माध्यम है।
युवाओं को नशे और सोशल मीडिया की लत से बचने की सलाह
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे न केवल स्वयं नशे से बचें, बल्कि अपने मित्रों को भी इससे दूर रहने के लिए प्रेरित करें।
उन्होंने इंटरनेट मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर भी छात्रों को सावधान किया। राधाकृष्णन ने युवाओं को डिजिटल माध्यमों का सीमित और विवेकपूर्ण उपयोग करने की सलाह देते हुए कहा कि तकनीक का इस्तेमाल उनके ज्ञान, कौशल और व्यक्तित्व विकास में सहायक होना चाहिए।
नई तकनीक में युवाओं के लिए बड़े अवसर
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकतों में शामिल है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान और उद्यमिता जैसे तेजी से उभरते क्षेत्रों में युवाओं के लिए व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाकर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को मजबूत किया जा सकता है। इसके लिए उच्च शिक्षण संस्थानों को बदलती तकनीक और रोजगार की जरूरतों के अनुरूप छात्रों को तैयार करना होगा।
राधाकृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के दृष्टिकोण में पूर्वोत्तर क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है। ऐसे में असम और पूर्वोत्तर के शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यहां से निकलने वाले युवा न केवल क्षेत्र के विकास, बल्कि देश की व्यापक विकास यात्रा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।












