लखनऊ (सोमवार, 07 सितंबर 2026)। उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए चल रही जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना के तहत इस साल जनवरी से अगस्त तक सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। योजना के तहत किए गए लक्षित प्रयासों से इस अवधि में 1107 लोगों की जान बचाने में सफलता मिली। वहीं, सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में 6.97 प्रतिशत और दुर्घटनाओं में मृतकों की संख्या में 8.03 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। घायलों की संख्या भी 6.11 प्रतिशत घटी है।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष की तुलना में जनवरी से अगस्त 2026 के बीच कुल 1255 सड़क दुर्घटनाएं कम हुईं। पुलिस का फोकस अब केवल हादसे के बाद राहत और कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि उन वजहों की पहचान कर उन्हें दूर करने पर है, जिनके कारण बार-बार दुर्घटनाएं होती हैं।
जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना में 700 दुर्घटना बाहुल्य स्थान शामिल
जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना के तहत प्रदेश के 59 जिलों में 700 सबसे अधिक दुर्घटना वाले स्थानों को चिन्हित कर योजना के दायरे में लिया गया है। इनमें से 213 दुर्घटना बाहुल्य स्थानों पर 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमें सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।
इन टीमों की भूमिका खास तौर पर दुर्घटना की आशंका वाले इलाकों में निगरानी बढ़ाने और हादसों को पहले ही रोकने की है। यानी पुलिस का प्रयास यह है कि दुर्घटना होने के बाद मौके पर पहुंचने के बजाय ऐसे हालात ही पैदा न होने दिए जाएं, जो किसी परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन जाएं।
सोमवार को पुलिस मुख्यालय में योजना के तीसरे और चौथे चरण में शामिल क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारियों की कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने अधिकारियों को सड़क दुर्घटनाओं के मूल कारणों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करने के निर्देश दिए।
ब्लैक स्पॉट और सड़क की खामियों पर नजर
डीजीपी ने कहा कि हादसों को कम करने के लिए केवल यातायात नियमों का पालन कराने से काम नहीं चलेगा। जहां दुर्घटनाएं बार-बार हो रही हैं, वहां यह पता लगाना जरूरी है कि आखिर इसकी वजह क्या है। ब्लैक स्पॉट, सड़क की संरचनात्मक खामियां, तेज रफ्तार और अन्य जोखिम वाले कारणों की पहचान कर उनके समाधान पर काम करने के निर्देश दिए गए।
क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को इसी उद्देश्य से सड़क सुरक्षा, मोटर वाहन अधिनियम और दुर्घटना जांच से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान टीमों को प्राथमिक उपचार और सीपीआर की जानकारी भी दी गई, ताकि हादसे की स्थिति में शुरुआती समय में घायल व्यक्ति को जरूरी सहायता मिल सके।
इसके साथ ही इंटरसेप्टर के प्रभावी इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। तेज रफ्तार वाहनों पर निगरानी सड़क दुर्घटनाओं को रोकने की रणनीति का अहम हिस्सा है, क्योंकि कई गंभीर हादसों में रफ्तार एक प्रमुख कारण बनकर सामने आती है।
हादसा रोकना है टीमों का सबसे बड़ा लक्ष्य
कार्यशाला में डीजीपी राजीव कृष्ण ने स्पष्ट किया कि क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों का उद्देश्य सिर्फ दुर्घटना के बाद की कार्रवाई करना नहीं है। उनका वास्तविक लक्ष्य हादसों की पुनरावृत्ति रोकना और लोगों की जान बचाना है।
इस दिशा में बेहतर कार्य करने वाली कानपुर के विधनू, बाराबंकी और सुल्तानपुर की क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को सम्मानित भी किया गया। इन टीमों के अनुभव दूसरे दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों में भी प्रभावी रणनीति तैयार करने में उपयोगी हो सकते हैं।
सड़क हादसों के आंकड़ों में आई गिरावट यह संकेत देती है कि दुर्घटना संभावित स्थानों पर लक्षित निगरानी और समय रहते किए गए हस्तक्षेप से परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। हालांकि, सड़क सुरक्षा की चुनौती बड़ी है और इसे स्थायी रूप से कम करने के लिए पुलिस के साथ-साथ सड़क निर्माण एजेंसियों, परिवहन विभाग और आम वाहन चालकों की भी बराबर भूमिका जरूरी है।










