नई दिल्ली/12 सितंबर 2026: नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शनिवार को BRICS नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। भारत की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में आतंकवाद, वैश्विक संघर्ष, व्यापारिक बाधाओं, टैरिफ, ऊर्जा और बहुपक्षीय सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर सदस्य देशों ने साझा रुख सामने रखा। सम्मेलन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणापत्र का मसौदा सदस्य देशों के सामने रखा और पूछा कि क्या किसी देश को इस पर कोई आपत्ति है। किसी सदस्य देश की ओर से आपत्ति नहीं जताई गई, जिसके बाद नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।
घोषणापत्र में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, व्यापार से जुड़ी बाधाओं पर चिंता जताने, आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने और अंतरराष्ट्रीय विवादों को बातचीत तथा कूटनीति के जरिए सुलझाने पर जोर दिया गया है।
BRICS नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 में आतंकवाद पर कड़ा रुख
आतंकवाद का मुद्दा इस घोषणापत्र के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में रहा। BRICS देशों ने सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों की फंडिंग और आतंकी संगठनों को सुरक्षित पनाह मिलने समेत आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की।
घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की भी निंदा की गई। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। खास बात यह रही कि इस बार चीन समेत BRICS के सभी सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख को घोषणापत्र में जगह दी।
सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर देते हुए आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों की जवाबदेही तय करने की बात कही। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र के व्यापक सम्मेलन (CCIT) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने और पारित करने का आह्वान भी किया गया।
युद्ध नहीं, बातचीत और कूटनीति से समाधान पर जोर
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों के बीच BRICS देशों ने युद्ध और टकराव को रोकने के प्रयास तेज करने की जरूरत बताई। घोषणापत्र में दोहराया गया कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत, आपसी सलाह और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर भी घोषणापत्र में गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। सभी संबंधित पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई है, जो क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकते हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया की स्थिति पर BRICS देशों के बीच संवाद और कूटनीति को समाधान का आधार बनाने पर सहमति बनी।
एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक बाधाओं पर चिंता
BRICS घोषणापत्र में वैश्विक व्यापार व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता दी गई है। सदस्य देशों ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता व्यक्त की है।
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय व्यापारिक तनाव, शुल्कों में बदलाव और आपूर्ति शृंखलाओं में अस्थिरता जैसी चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में BRICS देशों ने अधिक सहयोग और एक मजबूत बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया है। घोषणापत्र में व्यापार को लेकर बढ़ते अवरोधों के बजाय सहयोग और स्थिरता का रास्ता अपनाने का संदेश दिया गया है।
नवीकरणीय ऊर्जा और विकास पर भी फोकस
घोषणापत्र का एजेंडा केवल भू-राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा। नवीकरणीय ऊर्जा, सतत विकास और तकनीकी सहयोग को भी BRICS के भविष्य के एजेंडे का अहम हिस्सा बनाया गया है।
भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता के दौरान सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास को केंद्रीय विषय बनाया है। सरकार के अनुसार BRICS का एजेंडा विकास, वित्त, तकनीक, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क जैसे व्यापक क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
पीएम मोदी बोले- घोषणाओं को जमीन पर उतारना जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणापत्र को BRICS देशों के साझा संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने साफ किया कि केवल घोषणाएं कर देना पर्याप्त नहीं है। असली चुनौती इन फैसलों को ठोस नतीजों में बदलने की है।
मोदी ने संघर्षों की रोकथाम, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, बहुपक्षवाद को मजबूत करने और एकतरफा व्यापारिक उपायों से जुड़ी चिंताओं को घोषणापत्र में शामिल किए जाने को महत्वपूर्ण बताया।
दरअसल, नई दिल्ली घोषणापत्र ऐसे समय आया है जब दुनिया एक साथ कई मोर्चों पर अस्थिरता का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया से लेकर व्यापारिक मोर्चे तक तनाव है और आतंकवाद की चुनौती भी बनी हुई है। ऐसे में BRICS का साझा संदेश यही है कि मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन संवाद और कूटनीति का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए।











