नई दिल्ली/16 सितंबर 2026: UPI को लेकर सरकार ने स्थिति काफी हद तक साफ कर दी है। आम लोगों के लिए UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेगा। पर्सन-टू-पर्सन (P2P) लेनदेन पर किसी भी राशि की कोई फीस नहीं लगेगी। वहीं, व्यापारियों को किए जाने वाले ₹2,000 तक के भुगतान भी MDR से मुक्त रहेंगे। सरकार के मुताबिक, करीब 96 प्रतिशत P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी वाले यूपीआई लेनदेन पर इस बदलाव का असर नहीं पड़ेगा।
लेकिन ₹2,000 से अधिक के कुछ व्यापारी लेनदेन पर अब 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) लागू होगा। यही वह बदलाव है, जिसे लेकर छोटे-बड़े कारोबारियों और डिजिटल भुगतान के भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
UPI पर MDR क्या है और किसे देना होगा?
MDR को आसान भाषा में समझें तो यह व्यापारी के डिजिटल भुगतान को स्वीकार करने की व्यवस्था से जुड़ा शुल्क है। यह कोई सरकारी टैक्स नहीं है और न ही इसे सरकार या NPCI अपने पास रखता है। निर्धारित MDR भुगतान प्रणाली से जुड़े भागीदारों, जैसे बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच बांटा जाएगा।
नए ढांचे के तहत ₹2,000 से अधिक के पात्र P2M लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा। हालांकि ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर प्रति लेनदेन MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है।
मसलन, यदि किसी पात्र व्यापारी को ₹10,000 का भुगतान यूपीआई से मिलता है तो 0.4 प्रतिशत के हिसाब से MDR ₹40 होगा। यह राशि ग्राहक से सीधे UPI शुल्क के तौर पर लेने की व्यवस्था नहीं है।
ग्राहक को UPI भुगतान के लिए पैसे नहीं देने होंगे
इस बदलाव का सबसे अहम पहलू यही है कि ग्राहक पर सीधे कोई UPI शुल्क नहीं लगाया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR व्यापारी भुगतान व्यवस्था के भीतर लागू होने वाला शुल्क है। बैंक और पेमेंट ऐप प्रदाताओं को ग्राहकों से UPI भुगतान के नाम पर अलग से शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी।
साथ ही, ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान और शून्य-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे व्यापारियों के लेनदेन भी मुफ्त रहेंगे।
छोटे व्यापारियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था है। P2PM श्रेणी में UPI QR के जरिये प्रति माह ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले स्ट्रीट वेंडर और छोटे कारोबारी शून्य MDR व्यवस्था में बने रहेंगे।
क्या MDR का बोझ आखिरकार ग्राहक पर आएगा?
यहीं से असली बहस शुरू होती है। नियम के मुताबिक ग्राहक से अलग UPI शुल्क नहीं लिया जा सकता, लेकिन कारोबारी अपने कारोबार की कीमत तय करते समय अपनी लागत को ध्यान में रख सकते हैं। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को अपनी कीमतों और भुगतान के दूसरे विकल्पों के जरिए किस तरह संभालते हैं।
यही वजह है कि छोटे कारोबार में नकद भुगतान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि किसी कारोबारी को डिजिटल भुगतान पर लागत महसूस होती है और वह नकद भुगतान को प्राथमिकता देने लगे, तो कुछ क्षेत्रों में कैश का इस्तेमाल बढ़ सकता है। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे व्यापक स्तर पर नकदी का दौर लौट आएगा।
क्या कैश का चलन बढ़ सकता है?
यूपीआई ने छोटे दुकानदारों के कारोबार में डिजिटल रिकॉर्ड बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। ग्राहक ने चाय की दुकान, किराना स्टोर या स्थानीय कारोबारी को भुगतान किया और उसका डिजिटल रिकॉर्ड बन गया। यही रिकॉर्ड आगे चलकर कारोबार की वास्तविक गतिविधियों को समझने में मदद कर सकता है।
ऐसे में यदि कोई व्यापारी डिजिटल भुगतान के बजाय नकद को प्राथमिकता देता है, तो उसके डिजिटल ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड स्वाभाविक रूप से कम हो सकता है। इसका असर भविष्य में औपचारिक वित्तीय सेवाओं, जैसे बैंकिंग और ऋण तक पहुंच पर पड़ सकता है। लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव कारोबारियों के व्यवहार और MDR के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि UPI के संचालन, साइबर सुरक्षा और डिजिटल भुगतान ढांचे को बनाए रखने में बैंकिंग तथा भुगतान प्रणाली के लिए लगातार लागत आती है। नए MDR ढांचे का उद्देश्य इसी पूरे इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना है।
कुछ जरूरी क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था
सरकार ने सभी क्षेत्रों के लिए एक जैसा MDR नहीं रखा है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक तथा कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर ₹5 प्रति लेनदेन का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।
वहीं, म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े कैपिटल मार्केट लेनदेन के लिए 0.02 प्रतिशत MDR, अधिकतम ₹300 प्रति लेनदेन की सीमा के साथ रखा गया है।
इससे साफ है कि नया ढांचा सिर्फ ₹2,000 की सीमा तय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग कारोबार और भुगतान श्रेणियों के लिए अलग नियम भी बनाए गए हैं।
96 प्रतिशत UPI लेनदेन पर क्यों नहीं पड़ेगा असर?
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, कुल P2M लेनदेन में करीब 96 प्रतिशत लेनदेन इस नए MDR के दायरे से बाहर रहेंगे। इनमें ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान और शून्य-MDR व्यवस्था में आने वाले छोटे व्यापारियों के लेनदेन शामिल हैं।
इसलिए आम ग्राहक के लिए रोजमर्रा की छोटी खरीदारी—जैसे किराना, भोजन, स्थानीय सेवाएं या अन्य छोटे भुगतान—पर तत्काल कोई UPI शुल्क नहीं लगाया गया है।
सवाल मुख्यतः बड़े मूल्य के व्यापारी भुगतान और उन कारोबारियों का है जो नए MDR के दायरे में आएंगे।
फिलहाल तस्वीर यह है कि UPI आम ग्राहक के लिए मुफ्त बना हुआ है, लेकिन व्यापारी भुगतान के एक सीमित हिस्से पर MDR की वापसी हुई है। आने वाले महीनों में कारोबारियों का व्यवहार यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगा कि इसका डिजिटल भुगतान और नकद लेनदेन पर वास्तविक असर कितना पड़ता है।












