नई दिल्ली/02 नवंबर 2026: नए साल से हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए किराए से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव होने जा रहा है। भारत में 1 जनवरी 2027 से भारतीय वायुयान नियम, 2026 लागू होंगे। इसके तहत एयरलाइन कंपनियां बाजार की मांग और परिचालन लागत के आधार पर हवाई किराया तय कर सकेंगी। सरकार सामान्य परिस्थितियों में किराए पर नियंत्रण नहीं लगाएगी, लेकिन असाधारण स्थिति या जनहित की आवश्यकता होने पर हस्तक्षेप कर सकेगी।
नई व्यवस्था में एयरलाइंस को किराया तय करने की स्वतंत्रता के साथ-साथ पारदर्शिता की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। उन्हें टिकट के कुल मूल्य और उससे जुड़े अलग-अलग शुल्कों की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
बाजार तय करेगा हवाई किराया, नहीं होगी ऊपरी सीमा
नई हवाई किराया नीति के तहत सरकार ने बाजार आधारित किराया व्यवस्था को जारी रखने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि एयरलाइंस को सामान्य परिस्थितियों में किराया तय करने की स्वतंत्रता होगी। सरकार की ओर से हवाई टिकटों पर कोई सामान्य अधिकतम मूल्य सीमा निर्धारित करने की योजना नहीं है।
हवाई किराए पर मांग, उपलब्ध सीटों, परिचालन लागत और अन्य बाजार परिस्थितियों का असर पड़ सकता है। हालांकि, इस स्वतंत्रता के साथ एयरलाइंस पर निगरानी भी बनी रहेगी, ताकि किसी असाधारण परिस्थिति में यात्रियों से अत्यधिक किराया वसूलने की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
एयरलाइंस को DGCA के पास जमा करना होगा टैरिफ
31 अक्टूबर को जारी गजट अधिसूचना के मुताबिक, प्रत्येक एयर ट्रांसपोर्ट कंपनी को परिचालन लागत सहित विभिन्न कारकों के आधार पर अपना टैरिफ निर्धारित करना होगा।
इसके बाद एयरलाइन कंपनियों को निर्धारित प्रारूप, प्रक्रिया और समयसीमा के अनुसार अपना टैरिफ नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के पास जमा करना होगा। आम यात्रियों की जानकारी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर भी किराए का विवरण प्रकाशित करना होगा।
नई व्यवस्था में टिकट की कीमत को केवल एकमुश्त राशि के रूप में दिखाने के बजाय उसके अलग-अलग घटकों का विवरण देना जरूरी होगा।
टिकट की कीमत में बेस फेयर से लेकर कैंसिलेशन चार्ज तक का विवरण
नई नीति के तहत एयरलाइंस को यात्रियों से वसूली जाने वाली कुल राशि के साथ-साथ उससे जुड़े शुल्कों की जानकारी अलग-अलग प्रदर्शित करनी होगी।
इसमें शामिल होंगे:
- बेस फेयर यानी टिकट का मूल किराया।
- लागू टैक्स और अन्य फीस।
- टिकट रद्द करने पर लगने वाला कैंसिलेशन चार्ज।
- रिफंड से संबंधित शर्तें।
- अन्य अतिरिक्त शुल्क।
इससे यात्रियों को टिकट बुक करते समय यह समझने में मदद मिलेगी कि उन्हें कुल कितनी राशि का भुगतान करना है और किन सेवाओं या शर्तों के लिए अलग शुल्क लिया जा रहा है।
हवाई किराए में बेतहाशा बढ़ोतरी पर सरकार कब करेगी हस्तक्षेप?
नई व्यवस्था में सरकार ने असाधारण परिस्थितियों में हस्तक्षेप करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखा है। गजट अधिसूचना के अनुसार, यदि केंद्र सरकार को लगता है कि कोई असाधारण स्थिति उत्पन्न हुई है और जनहित में हस्तक्षेप जरूरी है, तो वह लिखित आदेश के माध्यम से निर्देश जारी कर सकती है।
ये निर्देश परिस्थितियों के अनुरूप होंगे और केवल निर्धारित अवधि तक ही प्रभावी रहेंगे।
इस प्रावधान का महत्व उन परिस्थितियों में बढ़ जाता है, जब किसी विशेष मार्ग पर अचानक यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है और टिकटों की कीमतों में तेज उछाल आने लगता है। ऐसे मामलों में सरकार जरूरत के अनुसार कदम उठा सकती है।
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था के तहत हवाई किराए तय करने में एयरलाइंस की भूमिका पहले की तरह बाजार आधारित रहेगी। हालांकि, टिकट की कीमत और उससे जुड़े शुल्कों का स्पष्ट विवरण उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
यात्रियों के लिए इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू पारदर्शिता है। टिकट बुक करते समय मूल किराया, टैक्स, कैंसिलेशन चार्ज और रिफंड की शर्तों को समझना आसान हो सकता है।
दूसरी ओर, हवाई किराए पर कोई सामान्य अधिकतम सीमा नहीं होने के कारण टिकट की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। सरकार का हस्तक्षेप असाधारण परिस्थितियों और जनहित की जरूरत पर निर्भर करेगा।













