सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल/07 नवंबर 2026: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित सुकना मिलिट्री स्टेशन पर भारतीय सेना के जवानों के साथ दीपावली मनाई। इस दौरान उन्होंने त्रिशक्ति कोर (33 कोर) के सैनिकों के साथ पारंपरिक ‘बड़ा खाना’ में हिस्सा लिया। जवानों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने पूर्वोत्तर भारत को देश का ‘पहला सिरा’ बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और अब दुश्मन ड्रोन, साइबर हमलों तथा सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार के जरिए भी चुनौती पेश कर रहा है। ऐसे में सेना को हर मोर्चे पर सतर्क और तैयार रहना होगा।
राजनाथ सिंह दिवाली: सुकना मिलिट्री स्टेशन पर जवानों के साथ मनाया त्योहार
दीपावली के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सुकना मिलिट्री स्टेशन पहुंचे। यहां उन्होंने भारतीय सेना के जवानों के साथ त्योहार की खुशियां साझा कीं और उनके साथ रात्रिभोज किया।
सैनिकों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि वह यहां किसी औपचारिक कार्यक्रम में मंत्री के रूप में शामिल होने नहीं आए हैं, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों के बीच दीपावली मनाने आए हैं।
उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा में जुटे जवानों के त्याग, समर्पण और साहस को नमन किया। रक्षा मंत्री ने सैनिकों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके परिवारों के कल्याण और सुविधाओं के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बदल रहा युद्ध का स्वरूप, ड्रोन और साइबर हमलों से बढ़ी चुनौती
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में बदलते सुरक्षा परिदृश्य का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों और सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। आधुनिक दौर में हाइब्रिड वॉरफेयर यानी बहुआयामी युद्ध की चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं।
दुश्मन अब सीधे सैन्य टकराव के अलावा साइबर हमलों, ड्रोन के जरिए निगरानी और सोशल मीडिया पर अफवाहों के माध्यम से भी देश की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश करता है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में सेना को तकनीकी रूप से सक्षम होने के साथ-साथ हर समय परिचालन तैयारियों को मजबूत बनाए रखना होगा। सूचना युद्ध और फेक न्यूज जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए भी सतर्कता जरूरी है।
उन्होंने सुकना मिलिट्री स्टेशन को पूर्वी भारत की सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इस क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए यहां तैनात सैनिकों की भूमिका बेहद अहम है।
‘पूर्वोत्तर भारत का आखिरी सिरा नहीं, पहला सिरा है’
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्वोत्तर भारत को लेकर देश की पारंपरिक सोच में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर को भारत का ‘लास्ट फ्रंटियर’ यानी आखिरी सीमा मानने के बजाय देश का ‘फर्स्ट फ्रंटियर’ यानी पहला सिरा माना जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत के भूगोल, जैव विविधता, सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन सभ्यता को समझने के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, विशिष्ट परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता के जरिए भारत की पहचान को समृद्ध करता है। साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की अखंडता के लिहाज से भी इसका महत्व बेहद व्यापक है।
राजनाथ सिंह के मुताबिक, पूर्वोत्तर भारत देश की सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण प्रहरी है। इसलिए इस क्षेत्र को केवल भौगोलिक सीमा के रूप में नहीं, बल्कि भारत की सामरिक और सांस्कृतिक शक्ति के अहम केंद्र के रूप में देखा जाना चाहिए।
जवानों के त्याग और समर्पण को किया नमन
दीपावली के मौके पर सैनिकों के बीच पहुंचकर रक्षा मंत्री ने उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि देश के जवान त्योहारों के दौरान भी अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटते। उनके समर्पण के कारण ही देशवासी सुरक्षित माहौल में त्योहार मना पाते हैं।
सुकना मिलिट्री स्टेशन पर जवानों के साथ दीपावली मनाने के दौरान राजनाथ सिंह का संदेश साफ रहा—देश की सुरक्षा केवल सीमाओं पर तैनात सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की साझा प्रतिबद्धता है।
पूर्वोत्तर को देश का पहला सिरा बताने और आधुनिक युद्ध की चुनौतियों पर जोर देने के साथ रक्षा मंत्री ने सैनिकों के मनोबल, तकनीकी तैयारी और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का आह्वान किया।













