नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026: बजट सत्र 2026 की शुरुआत एक स्पष्ट संदेश के साथ हुई। संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सांसदों से राष्ट्रपति के अभिभाषण को गंभीरता से लेने की अपील की। उनका कहना था कि राष्ट्रपति का भाषण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास, क्षमताओं और खासकर युवाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि सांसदों ने राष्ट्रपति द्वारा बताए गए मार्गदर्शन और 2026 के लिए रखी गई उम्मीदों को गंभीरता से आत्मसात किया होगा। उनके शब्दों में, “राष्ट्रपति ने सांसदों को दिशा देने के लिए कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं। उम्मीद है कि सभी सांसदों ने इसे गंभीरता से लिया होगा।”
बजट सत्र 2026: राष्ट्रपति का भाषण क्यों अहम?
पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण सरकार की नीतियों का खाका भर नहीं होता, बल्कि यह देश की सामूहिक चेतना और भविष्य की रूपरेखा को सामने रखता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं की आकांक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा है और उसकी अपेक्षाएं पहले से कहीं अधिक स्पष्ट हैं।
उनके मुताबिक, संसद में बैठे जनप्रतिनिधियों के लिए यह भाषण एक प्रकार का मार्गदर्शक दस्तावेज होता है, जिसे केवल सुनना ही नहीं, समझना और उस पर अमल करना भी आवश्यक है।
‘विकसित भारत 2047’ और सदी का दूसरा चौथाई हिस्सा
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में समय की धारा को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है और अब अगला 25 साल का दौर ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा तय करेगा।
उन्होंने कहा, “सदी के इस दूसरे चौथाई हिस्से का पहला बजट पेश होने वाला है। यह केवल वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की दिशा तय करने वाला रोडमैप है।”
इस संदर्भ में उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का उल्लेख करते हुए कहा कि वह लगातार 9वीं बार संसद में बजट पेश करने जा रही हैं, जो संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण है।
भारत–ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का जिक्र
बजट सत्र 2026 की शुरुआत के साथ प्रधानमंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे भारत की बढ़ती वैश्विक साख और आत्मविश्वास का संकेत बताया।
पीएम मोदी ने कहा कि यह समझौता भारतीय मैन्युफैक्चरर्स, युवाओं और आत्मनिर्भर भारत की सोच को नई ऊर्जा देगा। “यह इस बात का प्रमाण है कि दुनिया भारत को एक अवसर के रूप में देख रही है,” उन्होंने कहा।
‘लास्ट माइल डिलीवरी’ और ‘रिफॉर्म्स एक्सप्रेस’ का संदर्भ
प्रधानमंत्री ने विपक्ष के रुख का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन यह भी तथ्य है कि सरकार ने योजनाओं को फाइलों से निकालकर जमीन तक पहुंचाने का काम किया है।
उन्होंने ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ पर जोर देते हुए कहा कि अब अगली पीढ़ी के सुधारों के जरिए ‘रिफॉर्म्स एक्सप्रेस’ को आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि योजनाएं सीधे नागरिकों के जीवन में बदलाव ला सकें।
निष्कर्ष
बजट सत्र 2026 की शुरुआत केवल संसदीय प्रक्रिया भर नहीं रही, बल्कि प्रधानमंत्री के संदेश के जरिए यह स्पष्ट संकेत मिला कि सरकार इस सत्र को देश के भविष्य की दिशा तय करने वाले अवसर के रूप में देख रही है। राष्ट्रपति के अभिभाषण को गंभीरता से लेने की सलाह इसी व्यापक सोच का हिस्सा है—जहां नीति, संसद और जनता की आकांक्षाएं एक साथ जुड़ती हैं।











