नई दिल्ली|12 मार्च 2026 (गुरुवार)। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच देश में रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर फैल रही अफवाहों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कुछ लोग जानबूझकर डर और भ्रम का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि इसका फायदा उठाकर कालाबाजारी की जा सके। ऐसे तत्वों के खिलाफ सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी।
प्रधानमंत्री ने गुरुवार को आयोजित एनएक्सटी (NXT) समिट को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन भारत सरकार देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि संकट के समय अफवाह फैलाना न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि यह देशहित के खिलाफ भी है।
प्रधानमंत्री ने कहा,
“कुछ लोग रसोई गैस और अन्य उत्पादों को लेकर डर का माहौल पैदा कर रहे हैं। ऐसे लोगों की सच्चाई जनता के सामने आ रही है। जो भी इस स्थिति का फायदा उठाकर कालाबाजारी करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
पश्चिम एशिया संकट के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति सामान्य
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ना स्वाभाविक है, क्योंकि इस क्षेत्र का अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति में बड़ा योगदान है। इसके बावजूद भारत सरकार ने समय रहते रणनीतिक कदम उठाए हैं, जिससे देश की ऊर्जा आपूर्ति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश मौजूदा संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन भारत ने अपनी मजबूत कूटनीति और विविध ऊर्जा स्रोतों के जरिए स्थिति को संतुलित रखा है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक आज वैश्विक मंचों पर भारत को एक स्थिर और भरोसेमंद अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कोई देश भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनना चाहता है, तो उसे भारत के साथ जुड़ना होगा।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी किया आश्वस्त
इस बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में बयान देते हुए स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है।
उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, एटीएफ और फ्यूल ऑयल की उपलब्धता देशभर में पर्याप्त मात्रा में है और रिटेल आउटलेट्स पर भंडार भी सुरक्षित है।
पुरी ने लोगों से अपील की कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि फर्जी नैरेटिव बनाने की कोशिशें देश की आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।
राज्यों को अतिरिक्त 48 हजार किलोलीटर केरोसिन जारी
ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने एहतियाती कदम भी उठाए हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्यों को 48 हजार किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन जारी करने का फैसला किया है।
आमतौर पर सरकारी तेल कंपनियां प्रत्येक तिमाही में राज्यों को लगभग 1 लाख किलोलीटर केरोसिन उपलब्ध कराती हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अतिरिक्त आवंटन किया गया है।
इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी क्षेत्र में ईंधन की कमी महसूस न हो और घरेलू जरूरतें प्रभावित न हों।
कोयला मंत्रालय ने भी जारी किए निर्देश
ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए कोयला मंत्रालय ने भी पहल की है। मंत्रालय ने सरकारी कंपनियों कोल इंडिया और सिंगारेनी कोलियरिज कंपनी लिमिटेड को निर्देश दिया है कि जरूरत के अनुसार राज्यों को अतिरिक्त कोयला उपलब्ध कराया जाए।
इस व्यवस्था का फायदा विशेष रूप से होटल, रेस्टोरेंट और अन्य गैर-घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगा, जो कोयले को ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे घरेलू गैस पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
33 करोड़ परिवारों की रसोई तक ईंधन पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश के 33 करोड़ से अधिक परिवारों तक ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना उसकी पहली प्राथमिकता है।
पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार, फिलहाल घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से डिलीवरी तक का औसत समय लगभग 2.5 दिन बना हुआ है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
साथ ही अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को भी एलपीजी की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। पिछले पांच दिनों में रिफाइनरियों के निर्देशों के जरिए एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है।
40 देशों से हो रहा कच्चे तेल का आयात
सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए तेल आयात के स्रोतों में भी विविधता लाई है। मंत्री पुरी ने बताया कि वर्तमान में भारत करीब 40 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय कूटनीति की वजह से भारत ने पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल सुनिश्चित कर लिया है, जो होर्मुज स्ट्रेट से आने वाली संभावित आपूर्ति के बराबर या उससे अधिक है।
राज्यों के साथ समन्वय, कालाबाजारी पर सख्त निगरानी
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार 11 मार्च को तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने कई राज्यों के मुख्य सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।
महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तमिलनाडु सहित कई राज्यों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है।
जिलास्तर पर निगरानी समितियां बनाई जा रही हैं और कई राज्यों में ईंधन की कालाबाजारी रोकने के लिए छापेमारी भी की गई है।
सरकार ने इसे एक राष्ट्रीय चुनौती बताते हुए कहा है कि केंद्र और राज्य मिलकर सहकारी संघवाद की भावना के साथ इस स्थिति का सामना करेंगे।












