सिलचर, 14 मार्च 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को असम के सिलचर से उत्तर-पूर्व भारत के विकास को नई दिशा देने वाली करीब 24 हजार करोड़ रुपये की सिलचर विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने बराक घाटी की ऐतिहासिक और आर्थिक अहमियत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र आने वाले समय में उत्तर-पूर्व का बड़ा लॉजिस्टिक और ट्रेड हब बन सकता है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा, “जहां कांग्रेस वालों के दिमाग का ताला बंद हो जाता है, वहां से हमारा काम शुरू होता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस सरकारों ने उत्तर-पूर्व को विकास की मुख्यधारा से दूर रखा।
सिलचर विकास परियोजनाएं: बराक घाटी को मिलेगा नया आर्थिक आधार
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि सिलचर को बराक घाटी का गेटवे माना जाता है। यह क्षेत्र भाषा, संस्कृति और व्यापारिक गतिविधियों के अनोखे संगम के रूप में जाना जाता है।
उन्होंने कहा कि बराक नदी के उपजाऊ मैदान, चाय बागान और शिक्षा संस्थान इस क्षेत्र की पहचान रहे हैं। यही वजह है कि केंद्र सरकार बराक घाटी को 21वीं सदी के अनुरूप मजबूत आर्थिक आधार देने के लिए लगातार निवेश कर रही है।
पीएम मोदी ने कहा कि नई परियोजनाओं से न केवल स्थानीय बुनियादी ढांचे में सुधार होगा बल्कि व्यापार, कृषि और पर्यटन को भी गति मिलेगी।
शिलॉन्ग-सिलचर कॉरिडोर से बदलेगी उत्तर-पूर्व की कनेक्टिविटी
इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण शिलॉन्ग–सिलचर कॉरिडोर का भूमि पूजन रहा।
- इस कॉरिडोर की लंबाई: 166 किलोमीटर
- अनुमानित लागत: लगभग 22,860 करोड़ रुपये
यह हाई-स्पीड एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर असम और मेघालय के बीच परिवहन को काफी तेज बनाएगा। इसके बनने के बाद गुवाहाटी से सिलचर की यात्रा का समय साढ़े आठ घंटे से घटकर करीब पांच घंटे रह जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परियोजना न केवल परिवहन सुविधा को बेहतर बनाएगी बल्कि पूरे क्षेत्र को व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी नया अवसर देगी।
बराक घाटी बनेगी लॉजिस्टिक और ट्रेड हब
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रेल, सड़क, कृषि और वन क्षेत्रों से जुड़ी नई सिलचर विकास परियोजनाएं बराक घाटी को उत्तर-पूर्व का प्रमुख लॉजिस्टिक केंद्र बना सकती हैं।
उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों की नई लहर आएगी और बराक घाटी विकास के नए अध्याय की ओर बढ़ेगी।
दक्षिण पूर्व एशिया के बाजार से जुड़ेगा उत्तर-पूर्व
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में भारत की एक्ट ईस्ट नीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिलॉन्ग-सिलचर कॉरिडोर बनने के बाद यह क्षेत्र मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे राज्यों से बेहतर तरीके से जुड़ जाएगा।
इन राज्यों के जरिए आगे बांग्लादेश और म्यांमार तक संपर्क मजबूत होगा, जिससे दक्षिण पूर्व एशिया के बड़े बाजारों तक पहुंच आसान हो सकती है।
प्रधानमंत्री के अनुसार इससे किसानों, व्यापारियों और स्थानीय उद्योगों को बड़ा फायदा मिलेगा।
कांग्रेस पर साधा राजनीतिक निशाना
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कांग्रेस की पूर्व सरकारों पर उत्तर-पूर्व की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कई दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने इस क्षेत्र को विकास से दूर रखा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारें सीमावर्ती क्षेत्रों को देश के “अंतिम गांव” मानती थीं, जबकि वर्तमान सरकार उन्हें “देश के पहले गांव” के रूप में विकसित करने की नीति पर काम कर रही है।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भाजपा-एनडीए की डबल इंजन सरकार उत्तर-पूर्व को देश के विकास के केंद्र में लाने के लिए लगातार काम कर रही है।
युवाओं और पर्यटन को मिलेगा लाभ
प्रधानमंत्री के अनुसार नई परियोजनाओं से न केवल व्यापार और परिवहन को फायदा होगा बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। बेहतर कनेक्टिविटी से देश के अन्य हिस्सों से उत्तर-पूर्व तक पहुंच आसान होगी।
उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर खुलेंगे।











