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ओम बिरला अविश्वास प्रस्ताव विवाद: पीएम मोदी ने लिखा पत्र, कहा—सदन ने ‘राजनीतिक कुकृत्य’ को किया अस्वीकार

On: March 15, 2026
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ओम बिरला अविश्वास प्रस्ताव विवाद- पीएम मोदी ने लिखा पत्र
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नई दिल्ली (Sun, 15 Mar 2026)। संसद की कार्यवाही के बीच उपजे राजनीतिक विवाद के बाद ओम बिरला अविश्वास प्रस्ताव मुद्दे ने नया मोड़ ले लिया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें एक पत्र लिखकर न सिर्फ उनके आचरण और कार्यशैली की सराहना की, बल्कि विपक्ष की मंशा पर भी सवाल खड़े किए।

प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि लोकसभा में बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव जिस तरह से सदन में अस्वीकार हुआ, वह इस बात का संकेत है कि संसद ने इस “राजनीतिक कुकृत्य” को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। उन्होंने इसके लिए सदन के सभी सदस्यों को भी बधाई दी।

ओम बिरला अविश्वास प्रस्ताव पर पीएम मोदी का पत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले देश के नागरिकों ने भी यह महसूस किया कि ओम बिरला अविश्वास प्रस्ताव के पीछे निजी स्वार्थ और अहंकार की भावना काम कर रही थी।

पीएम मोदी ने बिरला द्वारा सदन में दिए गए वक्तव्य की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने लिखा कि आपने जिस संतुलन, धैर्य और स्पष्टता के साथ संसदीय इतिहास, अध्यक्ष के दायित्वों और नियमों की सर्वोच्चता का उल्लेख किया, वह अत्यंत प्रभावशाली है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, बिरला का वक्तव्य केवल उस क्षण का जवाब नहीं था, बल्कि यह भारतीय संसदीय परंपरा और लोकतांत्रिक मर्यादा की गहरी व्याख्या भी है।

विपक्ष पर साधा निशाना

पत्र में प्रधानमंत्री ने बिना किसी दल का नाम लिए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कभी-कभी राजनीतिक असहमति संसदीय मर्यादा के प्रति अनादर में बदलती दिखाई देती है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए चिंता का विषय है।

पीएम मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष को लोकतांत्रिक संस्थाओं, नियमों और संसदीय गरिमा का संरक्षक बताते हुए कहा कि आपने अपने वक्तव्य में यह स्पष्ट किया कि सदन में कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं है। यह संदेश लोकतंत्र की मूल भावना को पुनर्स्थापित करता है।

प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के कार्यकाल का भी उल्लेख किया और कहा कि उस समय भी कई मौकों पर आसन के प्रति कुछ सदस्यों का व्यवहार अपेक्षित संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं था।

“परिवारवादी सोच लोकतंत्र के खिलाफ” — पीएम मोदी

पत्र में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश के लोग तब दुखी होते हैं जब कुछ लोग लोकतांत्रिक संस्थाओं को भी अपने सीमित दायरे में देखने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने संकेत देते हुए कहा कि परिवारवादी और सामंती सोच रखने वाले कुछ लोग लोकतंत्र में नए नेतृत्व को सहजता से स्वीकार नहीं कर पाते। उन्हें यह भी स्वीकार नहीं होता कि नए और युवा सांसदों को भी सदन में बराबरी का अवसर मिले।

प्रधानमंत्री ने इसे लोकतंत्र की भावना के विपरीत बताया।

ओम बिरला ने जताया प्रधानमंत्री का आभार

प्रधानमंत्री का यह पत्र सामने आने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसे साझा किया और प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

बिरला ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय लोकतंत्र की परंपराओं, नियमों और प्रक्रियाओं पर अटूट विश्वास रहा है। उनका यह संदेश लोक सेवा के उच्च नैतिक मूल्यों को दर्शाता है, जिन्हें उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में जिया है।

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री सदैव संसद की मूल भावना—संवाद, तर्क और विचार-विमर्श—में विश्वास रखते हैं। उनका यह संदेश दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर संसद, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधियों को प्रेरित करेगा।

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