नई दिल्ली|26 अप्रैल 2026: देश में चल रही जनगणना 2027 को लेकर राजनीतिक बहस के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक स्पष्ट संदेश दिया—यह सिर्फ सरकार की प्रक्रिया नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के जरिए उन्होंने न सिर्फ इस अभियान की प्रगति साझा की, बल्कि इसे “जनभागीदारी का राष्ट्रीय अभियान” भी बताया।
प्रधानमंत्री के शब्दों में, “देश में एक बहुत अहम अभियान चल रहा है, जिसके बारे में हर भारतीय को जानना जरूरी है—यह है जनगणना।”
जनगणना 2027: डिजिटल भारत की नई तस्वीर
इस बार की जनगणना 2027 पारंपरिक ढर्रे से हटकर पूरी तरह डिजिटल और तकनीक-आधारित होगी। प्रधानमंत्री ने बताया कि:
- घर-घर जाने वाले कर्मचारियों के पास मोबाइल ऐप होगा
- वे सीधे उसी ऐप में जानकारी दर्ज करेंगे
- नागरिकों को खुद भी डेटा भरने की सुविधा मिलेगी
यह बदलाव सिर्फ प्रक्रिया को तेज करने के लिए नहीं है, बल्कि इसे अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जो लोग पहले जनगणना प्रक्रिया का हिस्सा रह चुके हैं, इस बार उनका अनुभव बिल्कुल अलग होगा—ज्यादा आसान, तेज और तकनीक से जुड़ा हुआ।
जनभागीदारी का मॉडल: अब आप खुद भी दे सकते हैं जानकारी
सरकार ने इस बार जनगणना 2027 में नागरिकों की भागीदारी को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है।
- कर्मचारी के आने से करीब 15 दिन पहले ही ऑनलाइन जानकारी भरने की सुविधा शुरू होगी
- नागरिक अपने समय के अनुसार डेटा दर्ज कर सकेंगे
- प्रक्रिया पूरी होने पर एक यूनिक आईडी मिलेगी
यह आईडी मोबाइल या ईमेल पर प्राप्त होगी, जिसे बाद में सत्यापन के समय दिखाया जा सकेगा। इससे दोबारा जानकारी देने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पूरी प्रक्रिया अधिक सहज बन जाएगी।
1.20 करोड़ परिवारों का सूचीकरण पूरा
प्रधानमंत्री ने जनगणना की प्रगति पर भी रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि जिन राज्यों में स्वगणना (Self Enumeration) का काम पूरा हो चुका है, वहां घरों के सूचीकरण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अब तक करीब 1.20 करोड़ परिवारों का मकान सूचीकरण पूरा किया जा चुका है—जो इस अभियान की गति और व्यापकता को दर्शाता है।
“आपकी जानकारी सुरक्षित है”—पीएम मोदी का भरोसा
जनगणना को लेकर लोगों के मन में डेटा सुरक्षा को लेकर उठने वाले सवालों पर भी प्रधानमंत्री ने जवाब दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी:
- पूरी तरह सुरक्षित (Secure) रखी जाएगी
- गोपनीय (Confidential) होगी
- डिजिटल सुरक्षा मानकों के तहत संरक्षित रहेगी
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बिना किसी झिझक के इस प्रक्रिया में भाग लें और इसे सफल बनाएं।
विज्ञान, ऊर्जा और विकास का कनेक्शन
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने जनगणना के साथ-साथ देश की वैज्ञानिक प्रगति और ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कलपक्कम में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की सफलता को भारत की वैज्ञानिक क्षमता का प्रतीक बताया। यह रिएक्टर हाल ही में “क्रिटिकैलिटी” के स्तर तक पहुंचा है, जो इसके संचालन की दिशा में एक अहम पड़ाव है।
साथ ही उन्होंने बताया कि भारत की पवन ऊर्जा क्षमता अब 56 गीगावाट से अधिक हो चुकी है और देश इस क्षेत्र में दुनिया में चौथे स्थान पर पहुंच गया है।
उनके अनुसार, सौर और पवन ऊर्जा केवल पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि देश के भविष्य की सुरक्षा के लिए भी जरूरी हैं।
निष्कर्ष: जनगणना से आगे—राष्ट्र निर्माण की भागीदारी
प्रधानमंत्री का संदेश सिर्फ जनगणना 2027 तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक व्यापक सोच को दर्शाता है—जहां हर नागरिक देश के विकास में सक्रिय भागीदार बनता है।
आज जब देश डिजिटल परिवर्तन (Digital Transformation) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब जनगणना जैसी प्रक्रिया भी उसी बदलाव का हिस्सा बनती जा रही है।
अब यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि एक ऐसा प्रयास है जिसमें हर नागरिक की भूमिका अहम है—क्योंकि आंकड़ों से ही नीतियां बनती हैं और नीतियों से देश का भविष्य तय होता है।










