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UP पुलिस भर्ती 2025: सीएम योगी आदित्यनाथ का बड़ा संदेश—‘माफिया मुक्त हो चुका है उत्तर प्रदेश’

On: April 27, 2026
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UP पुलिस भर्ती 2025, सीएम योगी आदित्यनाथ का बड़ा संदेश
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लखनऊ, 26 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रिजर्व पुलिस लाइन में रविवार का दिन सिर्फ एक औपचारिक परेड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उस बदलाव की कहानी भी कह गया, जिसे सरकार “नया यूपी” कहती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस कांस्टेबल के UP पुलिस भर्ती 2025 बैच की पासिंग आउट परेड की सलामी लेते हुए नवागत जवानों के सामने एक स्पष्ट और सख्त संदेश रखा—अब राज्य में कानून का राज है, माफिया का नहीं।

मुख्यमंत्री का भाषण केवल औपचारिकता नहीं था, उसमें एक राजनीतिक संदेश, प्रशासनिक दृष्टिकोण और भावनात्मक जुड़ाव तीनों का मिश्रण साफ नजर आया। उन्होंने कहा कि पुलिस बल की असली ताकत उसकी वर्दी नहीं, बल्कि उसका अनुशासन और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता है।

“माफिया को संरक्षण नहीं, कुचलने का काम कर रही पुलिस”

सीएम योगी ने अपने संबोधन में बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि एक समय ऐसा था जब उत्तर प्रदेश की पहचान कानून-व्यवस्था के संकट से जुड़ी हुई थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।

उन्होंने कहा, “आज उत्तर प्रदेश पुलिस न सिर्फ प्रदेश में, बल्कि देशभर में एक सक्षम और भरोसेमंद बल के रूप में उभरी है। यहां माफिया को संरक्षण देने की नहीं, बल्कि उन्हें खत्म करने की नीति पर काम हो रहा है।”

उनके इस बयान में राजनीतिक आत्मविश्वास के साथ-साथ कानून व्यवस्था को लेकर सरकार की प्राथमिकता भी साफ झलकती है।

दंगे, रंगदारी और गुंडा टैक्स—अब अतीत की बातें

मुख्यमंत्री ने पिछले वर्षों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय प्रदेश दंगों, रंगदारी और गुंडा टैक्स जैसी समस्याओं से जूझता था। व्यापारियों से लेकर आम नागरिक तक असुरक्षा की भावना में जीते थे।

लेकिन अब, उनके अनुसार, स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। “जहां पहले दंगे होते थे, आज पुलिस उन्हें होने से पहले ही रोक देती है,” उन्होंने कहा।

यह बयान न सिर्फ सरकार की उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया, बल्कि नए जवानों के लिए एक जिम्मेदारी का संकेत भी था—कि इस स्थिति को बनाए रखना अब उनकी जिम्मेदारी है।

नवागत पुलिसकर्मियों को संदेश: सख्ती और संवेदनशीलता का संतुलन

UP पुलिस भर्ती 2025 के तहत शामिल हुए नए कांस्टेबलों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने एक अहम बात कही—कानून का पालन करते समय संतुलन जरूरी है।

उन्होंने कहा, “अपराधियों के प्रति कानून उतना ही सख्त होना चाहिए, जितना वह आम नागरिकों के प्रति संवेदनशील है।”

यह एक ऐसा संदेश था जो पुलिसिंग के मानवीय पक्ष को रेखांकित करता है—जहां कठोरता और सहानुभूति दोनों साथ-साथ चलते हैं।

महिला पुलिसकर्मियों की बढ़ती भागीदारी—एक बदलता चेहरा

इस समारोह में महिला पुलिसकर्मियों की उपस्थिति भी खास रही। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से महिला आरक्षियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अनुशासन और समर्पण के साथ प्रशिक्षण पूरा किया है।

प्रदेश में महिला कार्यबल को 13 प्रतिशत से बढ़ाकर 26 प्रतिशत करना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि पुलिसिंग के बदलते स्वरूप की झलक है। इससे यह संकेत मिलता है कि सुरक्षा व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

2.18 लाख भर्तियां और तीन गुना बजट—संरचना में बड़ा बदलाव

मुख्यमंत्री ने आंकड़ों के जरिए यह भी बताया कि पिछले नौ वर्षों में 2.18 लाख से अधिक पुलिस कर्मियों की भर्ती की गई है, जबकि एक लाख से ज्यादा को पदोन्नति मिली है।

पुलिस बजट में तीन गुना वृद्धि और सात पुलिस कमिश्नरेट की स्थापना जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि सरकार ने सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि संरचनात्मक सुधार पर भी ध्यान दिया है।

15 जून 2025 को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah द्वारा 60,000 से अधिक कांस्टेबलों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे पुलिस बल के विस्तार का महत्वपूर्ण चरण बताया।

आधुनिक प्रशिक्षण और तकनीकी मजबूती पर जोर

आज की पुलिसिंग सिर्फ लाठी और बंदूक तक सीमित नहीं है, यह तकनीक और रणनीति का मिश्रण बन चुकी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रशिक्षण क्षमता, जो पहले मात्र 3,000 थी, अब बढ़कर 60,000 हो चुकी है। जवानों को आधुनिक हथियारों, जैसे इंसास राइफल, से प्रशिक्षित किया जा रहा है।

इसके साथ ही आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) को National Investigation Agency की तर्ज पर प्रशिक्षित किया जा रहा है।

प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर पुलिस स्टेशन और फोरेंसिक लैब की स्थापना, बदलते अपराध स्वरूप के प्रति सरकार की तैयारी को दर्शाती है।

‘मिशन शक्ति’ और सुरक्षा का सामाजिक आयाम

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे ‘मिशन शक्ति’ अभियान का भी जिक्र किया गया। यह सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास का सवाल भी है।

जब कोई महिला रात में निडर होकर घर लौट सके, तभी किसी राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को वास्तव में सफल कहा जा सकता है—सरकार का फोकस इसी दिशा में दिखाई देता है।

डीजीपी का बयान: रिकॉर्ड स्तर की भर्ती

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक Rajeev Krishna ने इस मौके पर कहा कि 2025 का बैच अपने आप में ऐतिहासिक है।

उन्होंने बताया कि 60,244 कांस्टेबलों की सीधी भर्ती देश में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में हुई है, जिसमें 12,000 से अधिक महिलाएं शामिल हैं।

यह न सिर्फ पुलिस बल के विस्तार का संकेत है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

निष्कर्ष: एक परेड, कई संदेश

लखनऊ की इस पासिंग आउट परेड ने सिर्फ नए पुलिसकर्मियों को वर्दी नहीं दी, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदारी भी सौंपी—एक ऐसे उत्तर प्रदेश को बनाए रखने की, जहां कानून सर्वोपरि हो।

UP पुलिस भर्ती 2025 सिर्फ एक भर्ती प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस व्यापक बदलाव का हिस्सा है, जिसे सरकार कानून व्यवस्था के नए मॉडल के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

अब देखना यह होगा कि ये नए जवान इस भरोसे को किस तरह जमीन पर उतारते हैं—क्योंकि असली परीक्षा परेड के मैदान में नहीं, बल्कि सड़कों पर होती है।

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