परामारिबो/नई दिल्ली (Fri, 08 May 2026)। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और मौजूदा समय में दुनिया के कुल विकास में भारत का योगदान 17 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल अपनी आर्थिक क्षमता बढ़ा रहा है, बल्कि वैश्विक आर्थिक जोखिमों को कम करने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
सूरीनाम में विभिन्न सामाजिक समूहों और भारतीय मूल के समुदाय के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए एस जयशंकर ने भारत की बढ़ती वैश्विक मौजूदगी, आर्थिक मजबूती और कोविड काल में निभाई गई मानवीय जिम्मेदारी का विस्तार से जिक्र किया।
एस जयशंकर बोले- वैश्विक अर्थव्यवस्था को नए विकल्प दे रहा भारत
विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के हालिया अनुमानों का हवाला देते हुए कहा कि इस वर्ष वैश्विक विकास में भारत की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत आंकी गई है। उन्होंने कहा कि दुनिया ऐसे समय से गुजर रही है जहां कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं धीमी वृद्धि, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव जैसी चुनौतियों से जूझ रही हैं, ऐसे में भारत स्थिर विकास का भरोसेमंद केंद्र बनकर उभरा है।
जयशंकर ने कहा, “भारत अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में जोखिम कम करने में मदद कर रहा है और अपने वैश्विक साझेदारों को अधिक विकल्प उपलब्ध करा रहा है।”
विशेषज्ञ मानते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, डिजिटल ढांचे का विस्तार और उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी ने उसे वैश्विक निवेश के लिए एक प्रमुख केंद्र बना दिया है।
नौ दिवसीय दौरे पर हैं एस जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर इस समय कैरेबियाई देशों के दौरे पर हैं। उनका यह दौरा 2 मई से 10 मई तक प्रस्तावित है, जिसमें जमैका, सूरीनाम तथा त्रिनिदाद और टोबैगो शामिल हैं।
जमैका की यात्रा पूरी करने के बाद वह बुधवार को सूरीनाम पहुंचे। इस दौरे का उद्देश्य भारत और कैरेबियाई देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना माना जा रहा है।
भारत लंबे समय से कैरेबियाई देशों के साथ ऐतिहासिक और प्रवासी भारतीय समुदाय के जरिए गहरे संबंध बनाए हुए है। सूरीनाम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिनकी सांस्कृतिक जड़ें उत्तर प्रदेश और बिहार से जुड़ी रही हैं।
कोविड काल में भारत की वैक्सीन नीति का भी किया जिक्र
अपने संबोधन में एस जयशंकर ने कोरोना महामारी के दौरान भारत की “वैक्सीन मित्रता” पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने उस कठिन दौर में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया, जबकि कई विकसित देशों ने जरूरत से कहीं अधिक वैक्सीन अपने पास जमा कर ली थीं।
उन्होंने कहा कि कुछ देशों ने अपनी आबादी से आठ गुना अधिक वैक्सीन तक सुरक्षित कर ली थी, जबकि दुनिया के कई विकासशील देशों को बुनियादी वैक्सीन उपलब्ध कराने में कठिनाई हो रही थी।
जयशंकर ने संकेत दिया कि भारत ने महामारी के दौरान दवाइयों और वैक्सीन की आपूर्ति के जरिए वैश्विक सहयोग की मिसाल पेश की। विदेश नीति के जानकारों के मुताबिक, कोविड काल में भारत की वैक्सीन कूटनीति ने कई देशों के साथ उसके संबंधों को नई मजबूती दी।
वैश्विक मंच पर बढ़ रही भारत की भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में भारत की भूमिका केवल क्षेत्रीय शक्ति तक सीमित नहीं रही है। जी-20 की अध्यक्षता, वैश्विक सप्लाई चेन में बढ़ती भागीदारी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल और विकासशील देशों की आवाज उठाने जैसे मुद्दों पर भारत लगातार सक्रिय दिखाई दिया है।
एस जयशंकर के बयान को भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें भारत खुद को वैश्विक दक्षिण की मजबूत आवाज और विश्व अर्थव्यवस्था के भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।












