मुंबई, 14 मई 2026। साईं बाबा की नगरी शिरडी अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं रहेगी, बल्कि देश के उभरते रक्षा उत्पादन मानचित्र पर भी अपनी मजबूत पहचान बनाने जा रही है। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले में स्थापित किए जा रहे शिरडी डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग काम्प्लेक्स का उद्घाटन अगले सप्ताह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। यह परियोजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई गति देने वाली बड़ी पहल मानी जा रही है।
करीब 200 एकड़ में फैले इस अत्याधुनिक रक्षा उत्पादन परिसर में तोप के गोले, ड्रोन, विस्फोटक सामग्री और एयरोस्पेस उपकरणों का निर्माण किया जाएगा। शुरुआती चरण में इस परियोजना पर लगभग 1,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।
रक्षा क्षेत्र में शिरडी की नई पहचान
अब तक शिरडी की पहचान मुख्य रूप से साईं बाबा मंदिर और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी रही है, लेकिन आने वाले समय में यह शहर रक्षा विनिर्माण क्षेत्र का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
राजनीतिक और औद्योगिक हलकों में इस परियोजना को महाराष्ट्र के लिए बड़ा औद्योगिक निवेश माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि देश के रक्षा उत्पादन को भी नई क्षमता हासिल होगी।
परियोजना का संचालन महाराष्ट्र स्थित निबे ग्रुप द्वारा किया जा रहा है, जो रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है।
23 मई को होगा उद्घाटन
जानकारी के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 23 मई को इस डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग काम्प्लेक्स का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और राज्य के जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल भी मौजूद रहेंगे।
दो दिवसीय इस आयोजन में देशभर से रक्षा विशेषज्ञ, इंजीनियर, छात्र, युवा नवोन्मेषक, एमएसएमई प्रतिनिधि और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल होंगे। कार्यक्रम को केवल उद्घाटन समारोह नहीं, बल्कि रक्षा तकनीक और नवाचार से जुड़े बड़े मंच के रूप में भी देखा जा रहा है।
2000 लोगों को मिलेगा रोजगार
इस परियोजना का सबसे बड़ा असर रोजगार के मोर्चे पर दिखाई देने की उम्मीद है। अधिकारियों के मुताबिक, डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग काम्प्लेक्स से सीधे और परोक्ष रूप से लगभग 2,000 लोगों को रोजगार मिलेगा।
स्थानीय स्तर पर इंजीनियरिंग, तकनीकी प्रशिक्षण, मशीन संचालन और सप्लाई चेन से जुड़े कई नए अवसर पैदा होंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे शिरडी और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ सकती हैं।
हर साल बनेंगे 5 लाख तोप के गोले
निबे ग्रुप के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक गणेश निबे ने बताया कि यह संयंत्र अत्याधुनिक रक्षा सामग्री निर्माण की क्षमता से लैस होगा। उन्होंने कहा कि यहां तोप के गोले, ड्रोन, विस्फोटक और एयरोस्पेस उपकरणों का निर्माण किया जाएगा।
उन्होंने दावा किया कि कंपनी के पास प्रति वर्ष करीब पांच लाख तोप के गोले बनाने की क्षमता होगी। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में उपयोग होने वाली कई उन्नत तकनीकी प्रणालियों के उत्पादन की भी योजना है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर बदलते सुरक्षा हालात के बीच भारत तेजी से घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में शिरडी जैसी परियोजनाएं रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
‘भक्ति और शक्ति का संगम बनेगा शिरडी’
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और शिरडी क्षेत्र के वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने इस परियोजना को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि शिरडी अब “भक्ति और शक्ति” दोनों का प्रतीक बनने जा रहा है।
विखे-पाटिल ने कहा, “एक ओर यह साईं बाबा की कृपा से जुड़ा आध्यात्मिक केंद्र है, वहीं दूसरी ओर हमारा प्रयास है कि इसे देश के प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्रों में शामिल किया जाए।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकारें अब धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान वाले शहरों को औद्योगिक विकास से जोड़ने की रणनीति पर भी काम कर रही हैं।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगा बल
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। ‘मेक इन India’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत निजी कंपनियों को रक्षा उत्पादन में अधिक अवसर दिए जा रहे हैं।
शिरडी डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग काम्प्लेक्स को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ निर्यात के नए अवसर भी खुल सकते हैं।













