गोरखपुर|17 मई 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गोरखपुर प्रवास रविवार को एक बार फिर आध्यात्म, परंपरा और जनसेवा के मेल का साक्षी बना। सुबह जनता दर्शन के जरिए लोगों की समस्याएं सुनने के बाद मुख्यमंत्री गोरखनाथ मंदिर की गोशाला पहुंचे, जहां उन्होंने गोवंश के बीच समय बिताया और स्वयं अपने हाथों से उन्हें गुड़ खिलाया।
गोरखनाथ मंदिर परिसर में यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोवंश को दुलारते हुए उनकी देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली। भीषण गर्मी को देखते हुए उन्होंने गोशाला के कर्मचारियों और सेवादारों को निर्देश दिया कि पशुओं के खानपान, पानी और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जाए।
सीएम योगी गोसेवा के दौरान गोवंश की देखभाल पर रहे गंभीर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गोसेवा से जुड़ाव पहले भी कई बार सामने आता रहा है। गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान वे अक्सर गोशाला पहुंचकर गोवंश के बीच समय बिताते हैं। रविवार को भी उनकी दिनचर्या पारंपरिक अंदाज में नजर आई।
सुबह सबसे पहले उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया। इसके बाद अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और आशीर्वाद लिया।
मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए मुख्यमंत्री सीधे गोशाला पहुंचे। यहां उन्होंने गोवंश को गुड़ खिलाया और कुछ देर तक उनके बीच मौजूद रहे। मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने गर्मी के मौसम में पशुओं के लिए पर्याप्त पानी, साफ-सफाई और छायादार व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
गोरखनाथ मंदिर की परंपरा से जुड़ी है गोसेवा
गोरखनाथ मंदिर में गोसेवा की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। मंदिर की गोशाला में बड़ी संख्या में गोवंश की देखभाल की जाती है। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी यहां गोसेवा को विशेष महत्व दिया जाता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो स्वयं गोरक्षपीठाधीश्वर भी हैं, मंदिर की परंपराओं और व्यवस्थाओं से व्यक्तिगत रूप से जुड़े रहते हैं। यही कारण है कि गोरखपुर प्रवास के दौरान उनकी दिनचर्या में पूजा-अर्चना के साथ गोशाला का भ्रमण भी शामिल रहता है।
रविवार सुबह मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री को गोवंश के बीच सहज रूप में देखा। कई लोगों ने इसे भारतीय सांस्कृतिक परंपरा और पशु संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक बताया।










