नई दिल्ली|22 मई 2026: भारत की संसदीय राजनीति से जुड़ी एक अहम प्रक्रिया का कैलेंडर तय हो गया है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को राज्यसभा चुनाव 2026 के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए बताया कि देश के 12 राज्यों की कुल 26 सीटों पर आगामी 18 जून 2026 को मतदान कराया जाएगा। इसी दिन मतों की गणना भी पूरी की जाएगी।
इन चुनावों के साथ राष्ट्रीय राजनीति की दिशा और राज्यसभा के आगामी समीकरणों पर भी नजरें टिक गई हैं, क्योंकि कई वरिष्ठ नेताओं का कार्यकाल समाप्ति की ओर है और कुछ राज्यों में उपचुनाव भी इसी कार्यक्रम के साथ कराए जाएंगे।
राज्यसभा चुनाव 2026 का पूरा शेड्यूल
निर्वाचन आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार चुनाव प्रक्रिया जून के पहले सप्ताह से शुरू होगी। अधिसूचना जारी होने के बाद उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेंगे और उसके बाद जांच व नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी। मतदान और मतगणना एक ही दिन कराई जाएगी।
चुनावी कार्यक्रम इस प्रकार है:
- 1 जून 2026 – अधिसूचना जारी
- 8 जून 2026 – नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि
- 9 जून 2026 – नामांकन पत्रों की जांच
- 11 जून 2026 – नाम वापस लेने की अंतिम तिथि
- 18 जून 2026 – मतदान और मतगणना
मतदान का समय सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित किया गया है।
किन राज्यों में कितनी सीटों पर होगा चुनाव
इस बार राज्यसभा के लिए होने वाला चुनाव नियमित रिक्तियों और उपचुनावों का मिश्रण होगा। 10 राज्यों की 24 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव होंगे, जबकि महाराष्ट्र और तमिलनाडु की एक-एक रिक्त सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा।
राज्यों के अनुसार सीटों का विवरण:
- आंध्र प्रदेश – 4 सीट
- गुजरात – 4 सीट
- कर्नाटक – 4 सीट
- मध्य प्रदेश – 3 सीट
- राजस्थान – 3 सीट
- झारखंड – 2 सीट
- मणिपुर – 1 सीट
- मेघालय – 1 सीट
- अरुणाचल प्रदेश – 1 सीट
- मिजोरम – 1 सीट
- महाराष्ट्र – 1 सीट (उपचुनाव)
- तमिलनाडु – 1 सीट (उपचुनाव)
महाराष्ट्र और तमिलनाडु में क्यों हो रहे हैं उपचुनाव
दो अतिरिक्त सीटों पर उपचुनाव इसलिए कराए जा रहे हैं क्योंकि संबंधित सदस्यों के इस्तीफे के बाद सीटें रिक्त हुई हैं। महाराष्ट्र में यह सीट सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के बाद खाली हुई, जबकि तमिलनाडु में सी. वी. षण्मुगम के पद छोड़ने के बाद उपचुनाव की जरूरत पड़ी।
कई वरिष्ठ नेताओं का कार्यकाल समाप्ति की ओर
इस चुनाव चक्र के साथ उच्च सदन के कई चर्चित चेहरों का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा, वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे नाम शामिल हैं। ऐसे में यह चुनाव केवल सीटों का नहीं, बल्कि संसद के आगामी राजनीतिक संतुलन का भी संकेत माना जा रहा है।










