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भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा सहयोग को नई मजबूती, हिंद-प्रशांत सुरक्षा के लिए रक्षा समझौते पर बनेगा MOU

On: June 1, 2026
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भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा सहयोग को नई मजबूती
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01 जून 2026, नई दिल्ली : हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक समीकरणों और बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा सहयोग एक नए चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। नई दिल्ली में आयोजित रक्षा मंत्रियों के दूसरे दौर के संवाद में दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इस दौरान रक्षा साजो-सामान और सेवाओं की आपूर्ति को लेकर एक नए समझौता ज्ञापन (MOU) के विकास पर सहमति बनी, जिसे दोनों देशों के रक्षा संबंधों में एक अहम कदम माना जा रहा है।

वैश्विक स्तर पर जारी संघर्षों, ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर बढ़ते दबाव और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया ने स्पष्ट संकेत दिया है कि दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता और मुक्त समुद्री व्यवस्था के लिए मिलकर काम करेंगे।

भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा सहयोग को मिलेगी नई दिशा

बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने द्विपक्षीय रक्षा संबंधों की व्यापक समीक्षा की। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि वर्तमान समय में भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध रणनीतिक दृष्टि से पहले से कहीं अधिक मजबूत और व्यापक हो चुके हैं।

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम रक्षा उपकरणों और सैन्य सेवाओं की आपूर्ति के लिए एक नए एमओयू को विकसित करने का निर्णय रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भविष्य में सैन्य हार्डवेयर के सह-उत्पादन और सह-विकास की संभावनाओं को भी बढ़ावा दे सकता है।

दोनों देशों ने रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने, तकनीकी साझेदारी को प्रोत्साहित करने और सैन्य क्षमता निर्माण के नए अवसर तलाशने पर भी चर्चा की।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा पर विशेष जोर

भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा सहयोग का एक प्रमुख केंद्र बिंदु हिंद-प्रशांत क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा रहा। दोनों पक्षों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और निर्बाध व्यापारिक गतिविधियों के महत्व को रेखांकित किया।

बैठक में ‘ज्वॉइंट मैरीटाइम सिक्योरिटी कोलैबोरेशन रोडमैप’ को अंतिम रूप देने पर सहमति बनी। इसके साथ ही समुद्री गश्ती विमानों के माध्यम से ‘अंडर-सी डोमेन अवेयरनेस’ यानी समुद्र के भीतर की गतिविधियों की निगरानी क्षमता को और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक व्यापार और सामरिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

पहली बार होगी ज्वॉइंट स्टाफ टॉक्स

दोनों देशों ने सैन्य स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए इस वर्ष पहली बार ‘ज्वॉइंट स्टाफ टॉक्स’ आयोजित करने के निर्णय का भी स्वागत किया।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल दोनों देशों की सेनाओं के बीच संवाद, प्रशिक्षण और परिचालन सहयोग को नई गति देगी। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में भी मदद मिलेगी।

क्वाड की भूमिका पर भी हुई चर्चा

बैठक में भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के समूह ‘क्वाड’ की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया। दोनों नेताओं ने कहा कि क्वाड हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS-1982) के तहत समुद्री स्वतंत्रता, हवाई मार्गों की आजादी और निर्बाध व्यापार के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर सहमति

गुरुग्राम स्थित सूचना समन्वय केंद्र (Information Fusion Centre) के माध्यम से समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर भी सहमति बनी। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा परिचालन समझ विकसित करने और समुद्री निगरानी तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

रणनीतिक साझेदारी के नए दौर का संकेत

नई दिल्ली में हुई यह बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा सहयोग अब पारंपरिक रक्षा संबंधों से आगे बढ़कर व्यापक रणनीतिक साझेदारी का रूप ले रहा है। रक्षा उत्पादन, समुद्री सुरक्षा, सैन्य समन्वय और क्वाड जैसे बहुपक्षीय मंचों पर बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।

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