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प्रोजेक्ट कुशा बनेगा भारत का नया सुरक्षा कवच, S-400 को देगा कड़ी टक्कर; राजनाथ सिंह ने बताया गेम-चेंजर

On: June 12, 2026
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प्रोजेक्ट कुशा बनेगा भारत का नया सुरक्षा कवच, S-400 को देगा कड़ी टक्कर
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हैदराबाद|12 जून 2026: भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई देने वाले प्रोजेक्ट कुशा को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम आने वाले वर्षों में देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। हैदराबाद में डीआरडीओ (DRDO) के एक नए केंद्र के उद्घाटन के दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट कुशा को भारत की रणनीतिक ताकत का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।

रक्षा मंत्री ने इस परियोजना की तुलना भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उठाए गए गोवर्धन पर्वत से करते हुए कहा कि जिस तरह गोवर्धन पर्वत ने लोगों की रक्षा की थी, उसी तरह यह प्रणाली भविष्य में देश को हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगी।

S-400 के समकक्ष तैयार हो रहा स्वदेशी सिस्टम

प्रोजेक्ट कुशा भारत द्वारा विकसित की जा रही लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली (Surface-to-Air Missile) उन्नत रक्षा प्रणाली है। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) विकसित कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रणाली कई मामलों में रूस के प्रसिद्ध S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के समकक्ष क्षमताएं हासिल करने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है।

इस सिस्टम में तीन श्रेणी की इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल होंगी, जो क्रमशः 150 किलोमीटर, 250 किलोमीटर और 400 किलोमीटर तक के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम होंगी। इसकी मदद से दुश्मन के लड़ाकू विमान, स्टील्थ एयरक्राफ्ट, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और उन्नत हवाई खतरों को निशाना बनाया जा सकेगा।

2028 से 2030 के बीच तैनाती की संभावना

रक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, प्रोजेक्ट कुशा का विकास तेजी से आगे बढ़ रहा है और भारतीय सशस्त्र बलों में इसकी तैनाती वर्ष 2028 से 2030 के बीच शुरू हो सकती है। इसके शामिल होने के बाद भारत की बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली और अधिक मजबूत हो जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह परियोजना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती देगी और विदेशी रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी।

ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र

अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने वर्ष 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा तकनीकों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी उपयोगिता और क्षमता का प्रदर्शन किया है। रक्षा मंत्री के अनुसार, आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप में उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा केवल हथियारों की संख्या से नहीं, बल्कि तकनीकी श्रेष्ठता और स्वदेशी नवाचार से तय होगी। इसी दिशा में प्रोजेक्ट कुशा एक महत्वपूर्ण कदम है।

वैश्विक तनाव के बीच आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता पर जोर

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत को अपनी सुरक्षा तैयारियों को लगातार मजबूत करना होगा। उन्होंने वैज्ञानिकों, सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियों, निजी उद्योगों और स्टार्टअप्स की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि देश का रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से विकसित हो रहा है।

उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मेहनत से विकसित प्रोजेक्ट कुशा भविष्य में देश की वायु सुरक्षा का मजबूत आधार बनेगा और किसी भी संभावित खतरे का प्रभावी जवाब देने में सक्षम होगा।

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