कानपुर|18 जून 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्राकृतिक खेती को देश के किसानों, समाज और भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब किसान आर्थिक रूप से मजबूत और समाज स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित होगा। उन्होंने रासायनिक खेती के बढ़ते दुष्प्रभावों पर चिंता जताते हुए किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज दुनिया ऊर्जा संकट, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इन चुनौतियों का मजबूती से सामना किया है और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।
Natural Farming से किसान और समाज दोनों को होगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक पद्धति नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने और समाज को स्वस्थ बनाने का एक व्यापक अभियान है। उनका कहना था कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग ने खेती की लागत तो बढ़ाई ही है, साथ ही लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाला है।
उन्होंने चिंता जताई कि किडनी, लीवर, ब्लड प्रेशर और मधुमेह जैसी बीमारियों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके पीछे खाद्यान्न में बढ़ती रासायनिक मात्रा भी एक महत्वपूर्ण कारण है। ऐसे में प्राकृतिक खेती भविष्य की जरूरत बनती जा रही है।
किसानों के लिए सरकार ने बढ़ाए सहायता के दायरे
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत का कम से कम डेढ़ गुना दिलाने की व्यवस्था लागू की है। इसके अलावा सॉइल हेल्थ कार्ड, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों को व्यापक सुरक्षा और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय और जीवन स्तर में भी सुधार लाना है।
यूपी के 34 जिलों को बनाया जा रहा प्राकृतिक खेती का मॉडल
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत राज्य के 34 जिलों को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है।
इनमें गंगा तट के 27 जिले और बुंदेलखंड क्षेत्र के सात जिले शामिल हैं। सरकार इन क्षेत्रों में किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षित करने के साथ-साथ आवश्यक संसाधन और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध करा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में इन जिलों को प्राकृतिक कृषि के मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे अन्य क्षेत्रों के किसानों को भी प्रेरणा मिलेगी।
उत्पादों के विपणन और प्रमाणन पर भी फोकस
प्राकृतिक खेती को व्यावसायिक रूप से सफल बनाने के लिए सरकार कृषि उत्पादों के प्रमाणन, पैकेजिंग और विपणन की मजबूत व्यवस्था विकसित कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिलेगा, तभी वे बड़े स्तर पर प्राकृतिक खेती की ओर आकर्षित होंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल कृषि सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और गो-आधारित कृषि परंपरा को सशक्त बनाने का भी प्रयास है।
7700 से अधिक गोशालाओं में संरक्षित हैं 14 लाख गोवंश
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान समय में 7700 से अधिक गोशालाएं संचालित हैं, जहां लगभग 14 लाख गोवंश संरक्षित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के माध्यम से किसानों को गोवंश पालन के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है।
उन्होंने कहा कि गोबर, पराली और अन्य कृषि अपशिष्ट अब केवल बेकार सामग्री नहीं हैं, बल्कि इन्हें ऊर्जा के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में विकसित किया जा रहा है।
बायोगैस और एथेनॉल से बढ़ेगी ऊर्जा आत्मनिर्भरता
मुख्यमंत्री ने कहा कि बायोगैस, सीएनजी और एथेनॉल उत्पादन जैसे प्रयास किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर देने के साथ देश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रहने वाली है।
अपने संबोधन के अंत में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी क्षेत्र का विकास तभी संभव है, जब वहां का किसान, व्यापारी, कारीगर और युवा समृद्ध हो। प्राकृतिक खेती इस दिशा में एक मजबूत और स्थायी कदम साबित हो सकती है।








