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फायर सेफ्टी ऑडिट हुआ अनिवार्य: बिना फायर एनओसी नहीं मिलेगा बिजली कनेक्शन और व्यापार लाइसेंस, योगी सरकार का बड़ा फैसला

On: June 26, 2026
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बिना फायर एनओसी नहीं मिलेगा बिजली कनेक्शन और व्यापार लाइसेंस, योगी सरकार का बड़ा फैसला
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लखनऊ/26 जून 2026: उत्तर प्रदेश में आग से होने वाली घटनाओं पर रोक लगाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब फायर सेफ्टी ऑडिट के बिना बड़े भवनों को न तो बिजली का नया कनेक्शन मिलेगा और न ही व्यापार का लाइसेंस जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेशभर में फायर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत कोचिंग संस्थानों से लेकर अस्पताल, शॉपिंग मॉल, सरकारी कार्यालय और औद्योगिक प्रतिष्ठानों तक सभी प्रमुख भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जाएगी।

फायर सेफ्टी ऑडिट के बिना नहीं मिलेगी एनओसी से जुड़ी सुविधाएं

आवास एवं नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव गुरुप्रसाद की ओर से जारी शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन भवनों के पास अग्निशमन विभाग की वैध एनओसी नहीं होगी, उन्हें बिजली कनेक्शन या व्यापार संचालन के लिए आवश्यक लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा।

यह निर्णय हाल ही में अलीगंज स्थित एक कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड के बाद लिया गया है। सरकार का मानना है कि भवन निर्माण और संचालन के दौरान यदि फायर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

कोचिंग, अस्पताल, मॉल और सरकारी भवनों की होगी जांच

नए निर्देशों के तहत प्रदेश के सभी बड़े भवनों में फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य होगा। इसमें कोचिंग संस्थान, शॉपिंग मॉल, सरकारी भवन, नर्सिंग होम, मेडिकल कॉलेज, अस्पताल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और औद्योगिक इकाइयों की विस्तृत जांच की जाएगी।

अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी संस्थानों में अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास, चेतावनी प्रणाली और अन्य सुरक्षा मानक पूरी तरह लागू हों। जिन स्थानों पर लापरवाही मिलेगी, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

हर जिले में बनेगी टास्क फोर्स, अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही

प्रदेश सरकार ने प्रत्येक जिले में विशेष टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह टीम समय-समय पर भवनों का निरीक्षण करेगी और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की निगरानी करेगी।

शासनादेश में यह भी कहा गया है कि यदि किसी भवन में अवैध गतिविधि या सुरक्षा नियमों की अनदेखी पाई जाती है तो संबंधित प्रवर्तन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। साथ ही फायर एनओसी जारी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

अग्निशमन विभाग, बिजली विभाग, विकास प्राधिकरण और नगर निगम को आपसी समन्वय के साथ भवनों के दस्तावेजों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी अग्निकांड की स्थिति में संबंधित विभागों का रिस्पॉन्स टाइम न्यूनतम रखने और अस्पतालों में तत्काल उपचार की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।

बेसमेंट में कोचिंग और लाइब्रेरी पर लगेगी रोक

सरकार ने बेसमेंट में संचालित हो रहे कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरी पर तत्काल रोक लगाने का फैसला किया है। इसके अलावा 15 मीटर से कम ऊंचाई वाले भवनों के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन की व्यवस्था लागू की जाएगी, ताकि छोटे भवनों में भी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके।

शासनादेश के अनुसार प्रत्येक भवन, संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग द्वार होना अनिवार्य होगा। इससे किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में आसानी होगी।

हर तहसील में बनेगा अग्निशमन केंद्र

फायर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सरकार ने प्रदेश की प्रत्येक तहसील में अग्निशमन केंद्र स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में भी आग लगने की घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण सुनिश्चित करना है।

सरकार का मानना है कि नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट, कड़े सुरक्षा मानक और जवाबदेही तय होने से भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी और लोगों की जान-माल की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

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