नई दिल्ली(26 जून 2026)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून 2026 तक सेशेल्स की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। यह दौरा सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर हो रहा है, जहां प्रधानमंत्री राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह दूसरी बार होगा जब नरेंद्र मोदी हिंद महासागर के इस महत्वपूर्ण द्वीपीय देश की यात्रा करेंगे। इससे पहले उन्होंने वर्ष 2015 में सेशेल्स का दौरा किया था।
इस अवसर पर भारतीय रक्षा बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेंगे। इसे दोनों देशों के मजबूत रक्षा और समुद्री सहयोग का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
भारत के लिए क्यों बढ़ गया है सेशेल्स का महत्व?
हिंद महासागर में स्थित सेशेल्स भले ही आकार में छोटा देश हो, लेकिन उसकी भौगोलिक स्थिति उसे वैश्विक रणनीति का अहम केंद्र बनाती है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत के लिए सुरक्षित समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।
भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व और अफ्रीकी देशों से आयात करता है। इन संसाधनों की आवाजाही मुख्य रूप से हिंद महासागर के समुद्री मार्गों से होती है। ऐसे में इन मार्गों के निकट स्थित सेशेल्स भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरा है।
हिंद महासागर में बढ़ रही है रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन लगातार अपनी आर्थिक और सामरिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, निवेश और कूटनीतिक सहयोग के जरिए बीजिंग छोटे द्वीपीय देशों के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है।
इसी पृष्ठभूमि में भारत भी सेशेल्स के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने पर जोर दे रहा है। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, हाइड्रोग्राफी, रक्षा क्षमता निर्माण, तटरक्षक सहयोग और आर्थिक साझेदारी जैसे कई क्षेत्रों में वर्षों से सहयोग जारी है।
फरवरी की बैठक के बाद अब रिश्तों को मिलेगी नई दिशा
फरवरी 2026 में सेशेल्स के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने सतत विकास, आर्थिक प्रगति और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक साझा दृष्टि दस्तावेज जारी किया था। अब प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा उसी सहयोग को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करेंगे। इसके अलावा हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग और आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा होगी।
समुद्री सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग को आगे बढ़ाना है। भारत लंबे समय से हिंद महासागर क्षेत्र में स्वयं को एक जिम्मेदार सुरक्षा साझेदार (Net Security Provider) के रूप में स्थापित करने की नीति पर काम कर रहा है।
सेशेल्स जैसे रणनीतिक साझेदारों के साथ मजबूत संबंध न केवल समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता, आपदा प्रबंधन, समुद्री निगरानी और रक्षा सहयोग को भी नई मजबूती प्रदान करते हैं। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल एक औपचारिक राजकीय दौरा नहीं, बल्कि भारत की व्यापक समुद्री और विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।












