नई दिल्ली, 29 जून। हरियाणा और राजस्थान के लाखों लोगों के लिए लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या के समाधान की दिशा में सोमवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में नई दिल्ली में हरियाणा-राजस्थान यमुना जल परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन को लेकर दोनों राज्यों के बीच औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। सरकार का मानना है कि इस पहल से करीब तीन दशक से लंबित जल विवाद का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।
समझौते के बाद अमित शाह ने कहा कि यह केवल दो राज्यों के बीच जल प्रबंधन का समझौता नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘सहकारी संघवाद’ के सिद्धांत का एक सफल उदाहरण भी है। उन्होंने कहा कि जब राज्य आपसी सहयोग और विश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं तो वर्षों से लंबित समस्याओं का भी व्यावहारिक समाधान निकल सकता है।
जुलाई से अक्टूबर तक 580 एमसीएम पानी पहुंचेगा राजस्थान
समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर के बीच लगभग 580 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी पश्चिमी यमुना प्रणाली से तीन भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा। प्रत्येक पाइपलाइन का व्यास 3.6 मीटर से अधिक होगा। इन पाइपलाइनों के माध्यम से हरियाणा और राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है।
समझौते में जल आवंटन, लागत साझाकरण, वित्तीय जिम्मेदारियां, पानी छोड़ने की प्रक्रिया और परियोजना के रखरखाव से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।
संचालन से लेकर विवाद समाधान तक हर पहलू का रखा गया ध्यान
इस परियोजना के लिए तैयार किए गए समझौते में केवल पाइपलाइन निर्माण ही नहीं, बल्कि संचालन व्यवस्था, रखरखाव, निगरानी तंत्र, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उपाय और संभावित विवादों के समाधान की प्रक्रिया भी विस्तार से तय की गई है।
अमित शाह ने कहा कि हरियाणा, राजस्थान और केंद्रीय जल आयोग द्वारा तैयार किया गया यह प्रारूप आने वाले कई दशकों तक एक संतुलित और विवादमुक्त व्यवस्था के रूप में काम करेगा। उन्होंने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में कम समय में इस जटिल विषय पर सहमति बन पाई।
इन जिलों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
हरियाणा-राजस्थान यमुना जल परियोजना का सबसे अधिक लाभ राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू जिलों को मिलेगा। वहीं हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्रों में भी पेयजल आपूर्ति को मजबूत किया जाएगा। लंबे समय से पानी की कमी झेल रहे इन इलाकों में लोगों को नियमित और बेहतर जल उपलब्ध होने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार, अब तक उपयोग में नहीं आ रहा यमुना का पानी लोगों की प्यास बुझाने के साथ-साथ बड़े जलाशयों में संग्रहित किया जाएगा, जिससे भूजल स्तर सुधारने में भी मदद मिलेगी।
1994 के जल समझौते का मिलेगा पूरा लाभ
इस परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से राजस्थान को उसके हिस्से का यमुना जल उपलब्ध कराना है। इससे वर्ष 1994 में अपर यमुना बेसिन के जल बंटवारे संबंधी समझौते के तहत राजस्थान को आवंटित पानी का प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से सूखा प्रभावित और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पेयजल की निरंतर उपलब्धता बढ़ेगी। इसके साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था, कृषि आधारित गतिविधियों और क्षेत्र के सामाजिक विकास को भी गति मिलने की संभावना है।
समयबद्ध क्रियान्वयन पर रहेगा जोर
केंद्र सरकार का कहना है कि यह समझौता केवल दस्तावेजी प्रक्रिया नहीं बल्कि परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन की मजबूत नींव है। केंद्र और दोनों राज्य सरकारें मिलकर इस योजना को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए समन्वित तरीके से काम करेंगी।
समझौता समारोह में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल सहित केंद्र और दोनों राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।












