लखनऊ/02 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने मानसिक मंदित एवं निराश्रित दिव्यांगजनों के कल्याण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्रों और हाफ-वे होम में रहने वाले संवासियों के भरण-पोषण के लिए दी जाने वाली मासिक अनुदान राशि 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति संवासी करने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि बढ़ती महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की लागत को देखते हुए यह फैसला दिव्यांगजनों के बेहतर जीवन स्तर और गरिमापूर्ण देखभाल सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
यूपी में दिव्यांगजन अनुदान राशि बढ़ी, मुख्यमंत्री ने बताई फैसले की वजह
गुरुवार को दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आश्रय गृहों में रहने वाले मानसिक मंदित एवं निराश्रित दिव्यांगजन पूरी तरह संस्थागत देखभाल पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में उन्हें पौष्टिक भोजन, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि समय के साथ जीवन-यापन की लागत बढ़ी है, इसलिए भरण-पोषण के लिए दी जाने वाली सहायता राशि में वृद्धि आवश्यक थी। सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है।
हर जिले में लगेंगे सहायक उपकरण वितरण शिविर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक जनपद में नियमित रूप से दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित किए जाएं। पात्र लाभार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक उपकरण समय पर उपलब्ध कराए जाएं।
उन्होंने श्रवण बाधित बच्चों की जल्द पहचान करने, समयबद्ध कॉक्लियर इम्प्लांट कराने और उपचार के बाद प्रभावी पुनर्वास सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया।
विशेष विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शिक्षकों की होगी समयबद्ध तैनाती
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दिव्यांग बच्चों की शिक्षा किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए विशेष विद्यालयों में प्रशिक्षित शिक्षकों की समयबद्ध नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने निर्देश दिए कि नियमित भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और जब तक नियुक्तियां पूरी नहीं होतीं, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षण जारी रखा जाए। साथ ही सरकारी भवनों को बाधारहित (Barrier-Free) बनाने और आधुनिक सुविधाओं से लैस करने पर भी जोर दिया गया।
विभाग की कई योजनाओं से मिल रहा है लाखों दिव्यांगजनों को लाभ
समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग वर्तमान में दिव्यांग पेंशन योजना, कुष्ठावस्था पेंशन, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना, शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार, दुकान निर्माण एवं संचालन योजना, निःशुल्क मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम, बचपन डे-केयर सेंटर, विशेष विद्यालय, जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र तथा उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा जैसी कई योजनाओं का संचालन कर रहा है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 12,23,295 दिव्यांगजन पेंशन योजना से लाभान्वित हुए। इसी अवधि में 34,420 पात्र दिव्यांगजनों को 43,689 विभिन्न प्रकार के सहायक उपकरण वितरित किए गए। वहीं 226 श्रवण बाधित बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया और चालू वित्तीय वर्ष में 68 जनपदों से 335 बच्चों की पहचान की जा चुकी है।
2017 के बाद बढ़ी विशेष विद्यालयों और डे-केयर सेंटरों की संख्या
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि वर्ष 2017 तक प्रदेश के केवल 10 जनपदों में बचपन डे-केयर सेंटर संचालित थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 25 जनपदों तक पहुंच गई है। इसके अलावा 28 अन्य जनपदों में नए केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है।
इसी तरह वर्ष 2017 तक प्रदेश में 16 विशेष विद्यालय संचालित थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 28 हो गई है। इन विद्यालयों में दिव्यांग बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, छात्रावास, भोजन, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, सहायक उपकरण और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सरकार का मानना है कि दिव्यांगजनों के सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और चिकित्सकीय पुनर्वास को मजबूत करने के लिए इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आने वाले समय में भी प्राथमिकता बना रहेगा।











