नई दिल्ली/07 जुलाई 2026: भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को नई दिशा देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच मंगलवार को कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी। रक्षा, डिजिटल भुगतान, चुनावी तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों और सांस्कृतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में हुए इन फैसलों को दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है। साझा बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि साझा इतिहास, संस्कृति और विश्वास पर आधारित हैं।
भारत-इंडोनेशिया समझौता: EVM, UPI और रक्षा सहयोग पर बने बड़े फैसले
द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने भारतीय तकनीक आधारित विशेष इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के विकास और निर्यात को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत भारत इंडोनेशिया की जरूरतों के अनुरूप ईवीएम विकसित करने में तकनीकी सहयोग देगा। इसे भारतीय चुनाव प्रबंधन प्रणाली पर बढ़ते वैश्विक भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।
डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भी अहम प्रगति हुई है। भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली के साथ एकीकृत करने पर सहमति बनी है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक लेनदेन, पर्यटन और सीमा-पार डिजिटल भुगतान पहले से अधिक आसान होने की उम्मीद है।
ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल सहयोग से रक्षा संबंध होंगे मजबूत
रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इंडोनेशिया ने भारत से अस्त्र मिसाइलों के आयात का निर्णय लिया है। साथ ही, वह अपने ब्रह्मोस मिसाइल भंडार का विस्तार कर रहा है, जिसके लिए भारत अतिरिक्त बैटरियां और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के रक्षा सहयोग को नई मजबूती देगा और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
महत्वपूर्ण खनिज और स्टील क्षेत्र में बढ़ेगा निवेश
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज के वैश्विक परिदृश्य में मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बेहद जरूरी है। इसी दिशा में भारत और इंडोनेशिया ने महत्वपूर्ण खनिजों, स्टील और दुर्लभ-पृथ्वी (Rare Earth) चुंबकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
भारत, इंडोनेशिया में स्टील, निकल और दुर्लभ-पृथ्वी स्थायी चुंबकों के उत्पादन से जुड़े निवेश को बढ़ावा देगा। दोनों देशों की कंपनियों के बीच स्टेनलेस स्टील और हाई-टेक मटेरियल के क्षेत्र में नई साझेदारियां भी विकसित की जाएंगी।
टैगोर और देवान्तारा के नाम पर मनाया जाएगा विशेष सांस्कृतिक वर्ष
साझा प्रेस वक्तव्य के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा की शताब्दी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया इस अवसर को ‘टैगोर-देवान्तारा सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति वर्ष’ के रूप में मनाएंगे।
प्रधानमंत्री ने बताया कि इंडोनेशिया के प्रथम शिक्षा मंत्री की हजर देवान्तारा के शिक्षा संबंधी विचार गुरुदेव टैगोर के दर्शन से गहराई से प्रभावित थे। यही साझा बौद्धिक विरासत दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाती है।
प्रंबानन मंदिर संरक्षण परियोजना का होगा शुभारंभ
प्रधानमंत्री मोदी ने जानकारी दी कि बुधवार को राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता स्थित एक हजार वर्ष से अधिक पुराने प्रंबानन मंदिर की संरक्षण परियोजना का शुभारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मंदिर भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है और दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों की गवाही देता है।
भारत-इंडोनेशिया समझौते की प्रमुख बातें
- भारत इंडोनेशिया के लिए विशेष EVM विकसित करने में सहयोग करेगा।
- भारत का UPI इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली से जोड़ा जाएगा।
- इंडोनेशिया भारत से अस्त्र मिसाइलों का आयात करेगा।
- ब्रह्मोस मिसाइल भंडार के विस्तार में भारत तकनीकी और लॉजिस्टिक सहयोग देगा।
- महत्वपूर्ण खनिज, स्टील और दुर्लभ-पृथ्वी चुंबकों के क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा।
- ‘टैगोर-देवान्तारा सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति वर्ष’ मनाने पर सहमति बनी।
- योग्याकार्ता के ऐतिहासिक प्रंबानन मंदिर संरक्षण परियोजना की संयुक्त शुरुआत की जाएगी।
भारत-इंडोनेशिया के बीच हुए ये समझौते केवल व्यापार या रक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल तकनीक, सांस्कृतिक विरासत, शिक्षा और रणनीतिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत भी माने जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में इन फैसलों का असर दोनों देशों के आर्थिक, सामरिक और सांस्कृतिक संबंधों पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।












