नई दिल्ली/12 जुलाई 2026: संसद के मानसून सत्र 2026 की शुरुआत से पहले केंद्र सरकार ने 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में सरकार अपने विधायी एजेंडे की रूपरेखा सभी राजनीतिक दलों के सामने रखेगी, जबकि विपक्ष उन मुद्दों को सूचीबद्ध करेगा जिन्हें वह पूरे सत्र के दौरान जोरदार ढंग से उठाने की तैयारी में है। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इस बार का मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहने के संकेत मिल रहे हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, सर्वदलीय बैठक सुबह 11 बजे शुरू होगी। संसद के प्रत्येक सत्र से पहले आयोजित होने वाली यह बैठक सरकार और विपक्ष के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच मानी जाती है। इसमें आगामी विधेयकों, चर्चा के विषयों और सदन के सुचारु संचालन पर विचार-विमर्श किया जाता है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस बार संसद के सामने कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है। ऐसे में सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक विधायी कार्य बिना व्यवधान के पूरे किए जाएं। दूसरी ओर, विपक्ष विभिन्न राजनीतिक और राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है।
NEET-UG और राजनीतिक दलों में टूट के मुद्दे पर सरकार को घेर सकता है विपक्ष
सूत्रों के अनुसार, विपक्ष NEET-UG परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर में हुई हताहतों को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर भी विपक्ष सरकार से जवाब मांग सकता है। कांग्रेस इस मामले में रक्षा मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस भी दे चुकी है।
संसद सत्र के दौरान विभिन्न दलों में हाल के दिनों में हुए राजनीतिक घटनाक्रम भी चर्चा का विषय बन सकते हैं। विपक्ष का आरोप है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को तोड़कर राजनीतिक समीकरण बदले जा रहे हैं और वह इस मुद्दे पर भी सरकार को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी में है।
पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के घटनाक्रम से बढ़ी राजनीतिक गर्माहट
हालिया राजनीतिक घटनाओं ने संसद सत्र से पहले माहौल और गर्म कर दिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में बड़े पैमाने पर राजनीतिक बदलाव देखने को मिले हैं। पार्टी के 20 सांसदों ने “नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया” में विलय का फैसला किया है और लोकसभा में अलग बैठने की मांग की है। वहीं, पार्टी के तीन राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
महाराष्ट्र में भी शिवसेना (यूबीटी) को झटका लगा है। लोकसभा के छह सांसद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। इसके अलावा, आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा मानसून सत्र
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्र सरकार की सिफारिश पर दोनों सदनों का सत्र बुलाने को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि इस दौरान राष्ट्रीय महत्व के कई विषयों पर चर्चा होगी और आवश्यक विधायी कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।
संविधान संशोधन विधेयक पर भी रह सकती है नजर
मानसून सत्र के दौरान प्रस्तावित 130वें संविधान संशोधन विधेयक पर भी राजनीतिक हलचल तेज रहने की संभावना है। इस विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट अपनाने की उम्मीद है, जिसके बाद रिपोर्ट संसद में पेश की जा सकती है।
विधेयक के एक प्रस्तावित प्रावधान पर सबसे अधिक चर्चा हो रही है। इसके अनुसार, यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या केंद्र अथवा राज्य सरकार का कोई मंत्री किसी गंभीर आपराधिक मामले में लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे स्वतः अपने पद से हटाने का प्रावधान किया जा सकता है। इस प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पहले से ही राजनीतिक बहस तेज हो चुकी है।
ऐसे में स्पष्ट है कि संसद मानसून सत्र 2026 केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।










