नई दिल्ली, 13 जुलाई। हवाई यात्रियों को महंगे टिकट और एयरलाइंस की ओर से वसूले जाने वाले अतिरिक्त शुल्कों से राहत मिलने की दिशा में एक अहम कदम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह भारतीय विमान अधिनियम, 2024 के तहत तैयार किए गए नियमों को दो सप्ताह के भीतर अदालत के समक्ष पेश करे। यह मामला एयर फेयर में होने वाले अचानक बदलाव और निजी एयरलाइनों द्वारा लगाए जाने वाले विभिन्न सहायक शुल्कों को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया।
शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि नियम संसद के समक्ष प्रस्तुत किए जा चुके हों, तब भी उन्हें सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष रखा जाए, ताकि न्यायालय उनकी समीक्षा कर सके।
मसौदा नियम तैयार, अनुवाद की प्रक्रिया जारी
मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने की। केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि भारतीय विमान अधिनियम, 2024 के तहत बनाए गए मसौदा नियम तैयार हैं और फिलहाल उनका अनुवाद कराया जा रहा है। इस जानकारी के बाद अदालत ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर नियम प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
हवाई यात्रियों की शिकायतों से जुड़ा है मामला
याचिका में कहा गया है कि निजी एयरलाइंस मांग बढ़ने के समय टिकटों की कीमतों में अचानक भारी वृद्धि कर देती हैं। इसके अलावा सीट चयन, अतिरिक्त सामान, प्राथमिक बोर्डिंग और अन्य सुविधाओं के नाम पर अलग-अलग शुल्क वसूले जाते हैं, जिससे यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि विमानन क्षेत्र में प्रभावी और स्वतंत्र नियामक व्यवस्था के अभाव में एयरलाइंस को मनमाने ढंग से किराया तय करने और अतिरिक्त शुल्क लगाने की खुली छूट मिल जाती है। ऐसे में पारदर्शी नियम और मजबूत निगरानी तंत्र की जरूरत है।
भारतीय विमान अधिनियम, 2024 से जुड़ी है उम्मीद
गौरतलब है कि भारतीय विमान अधिनियम, 2024 जनवरी 2025 से लागू हो चुका है। इस कानून का उद्देश्य देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को आधुनिक और अधिक जवाबदेह बनाना है। हालांकि, इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक नियम अभी तक अधिसूचित नहीं किए गए हैं।
याचिका में मांग की गई है कि यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र और मजबूत विमानन नियामक बनाया जाए, जो टिकट किराए, अतिरिक्त शुल्क और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े मामलों पर प्रभावी निगरानी रख सके।
नियम आने के बाद बदल सकती है व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि नए नियम जल्द अधिसूचित होते हैं, तो भविष्य में मनमाने हवाई किराए, अतिरिक्त शुल्क और यात्रियों से जुड़े कई विवादों पर स्पष्ट नियामक व्यवस्था लागू हो सकती है। इससे एयरलाइंस की जवाबदेही बढ़ने के साथ-साथ यात्रियों के अधिकारों को भी अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।











