नई दिल्ली/15 जुलाई 2026: केंद्र सरकार ने यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा लक्ष्य तय किया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को घोषणा की कि दिसंबर 2028 तक यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यमुना में एक भी लीटर गंदा पानी न पहुंचे। इसके लिए दिल्ली में सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के शुद्धिकरण हेतु करीब 80 ट्रीटमेंट प्लांट पर काम शुरू हो चुका है।
यह घोषणा नई दिल्ली में दिल्ली नगर निगम (MCD) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच गोबर के वैज्ञानिक प्रबंधन और कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट स्थापित करने संबंधी समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर के दौरान की गई।
यमुना सफाई अभियान: 2028 तक गंदा पानी रोकने का लक्ष्य, गोबर से बनेगी बायो-गैस
अमित शाह ने कहा कि यह पहल केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश के अन्य महानगरों के लिए भी एक मॉडल साबित होगी। उनका कहना था कि गोबर के वैज्ञानिक उपयोग से एक साथ कई समस्याओं का समाधान होगा—पशुपालकों की आय बढ़ेगी, शहरों की स्वच्छता बेहतर होगी, कंप्रेस्ड बायो-गैस का उत्पादन बढ़ेगा और जैविक खेती को भी नई मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यमुना शुद्धिकरण संकल्प को साकार करने की दिशा में यह समझौता एक महत्वपूर्ण कदम है।
80 ट्रीटमेंट प्लांट पर काम शुरू
अमित शाह ने बताया कि दिल्ली में सीवेज और औद्योगिक कचरे के उपचार के लिए करीब 80 ट्रीटमेंट प्लांट विकसित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना उपचारित पानी यमुना में न पहुंचे।
उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार कर रही है जिससे भविष्य में गोबर का एक छोटा हिस्सा भी यमुना नदी में न जाने पाए।
सवा लाख मवेशियों के अपशिष्ट का होगा वैज्ञानिक निस्तारण
केंद्रीय गृह मंत्री के अनुसार, दिल्ली में लगभग 1.25 लाख मवेशियों से निकलने वाले गोबर और जैविक अपशिष्ट के उचित निस्तारण के बिना यमुना को स्वच्छ बनाना संभव नहीं है।
इसके लिए नांगली, घोघा-गोयला और गाजीपुर में स्थापित किए जा रहे अपशिष्ट निस्तारण और बायो-गैस संयंत्रों में गोबर की प्रोसेसिंग की जाएगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
पशुपालकों को मिलेगा आर्थिक लाभ
अमित शाह ने कहा कि इस समझौते के तहत पशुपालकों को गोबर के बदले प्रति किलोग्राम एक रुपये का भुगतान किया जाएगा। इससे पशुपालकों की अतिरिक्त आय का नया स्रोत तैयार होगा और गोबर के वैज्ञानिक संग्रहण को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
उन्होंने कहा कि यह मॉडल भविष्य में देशभर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है, जिससे स्वच्छता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिलेगी।
कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (लल्लन सिंह), दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय गृह सचिव, केंद्रीय सहकारिता सचिव तथा केंद्र और दिल्ली सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
स्वच्छ यमुना की दिशा में बड़ा कदम
यमुना की सफाई लंबे समय से दिल्ली की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में शामिल रही है। सरकार का मानना है कि सीवेज उपचार संयंत्रों के विस्तार और गोबर आधारित बायो-गैस परियोजनाओं के जरिए प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण पाया जा सकेगा। यदि तय समयसीमा के भीतर सभी परियोजनाएं पूरी होती हैं तो दिसंबर 2028 तक यमुना को स्वच्छ बनाने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिल सकती है।












