नई दिल्ली, 26 जुलाई। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्र की राजनीति में जारी टकराव धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी थमता नजर नहीं आ रहा है। विपक्ष अब केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को पर्याप्त नहीं मान रहा, बल्कि छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक माफी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। इसी मुद्दे को लेकर संसद के आगामी सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं।
सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दल सोमवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में होने वाली इंडिया (INDIA) गठबंधन की बैठक में आगे की रणनीति तय करेंगे। इसी बैठक में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 पर विपक्ष का रुख भी अंतिम रूप से तय किया जाएगा।
पेपर लीक विरोधी बिल पर संसद में गरमा सकता है माहौल
लोकसभा की कार्यसूची के अनुसार, पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 सोमवार को सदन में पेश किया जाएगा। इसके बाद बिल पर चर्चा और पारित कराने की प्रक्रिया प्रस्तावित है।
माना जा रहा है कि NEET पेपर लीक विवाद और छात्रों के आंदोलन को लेकर विपक्ष सरकार से कई सवाल पूछेगा, जिससे संसद में तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।
राहुल गांधी ने अमित शाह को लिखा पत्र
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन सहित बल प्रयोग की अनुमति गृह मंत्रालय की ओर से दी गई थी।
राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का मूल अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा उनकी मांगों पर संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की है।
कांग्रेस ने कहा- अब प्रधानमंत्री को माफी मांगनी चाहिए
कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों के संघर्ष की जीत बताया, लेकिन साथ ही कहा कि इससे मामला समाप्त नहीं हुआ है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के लिए माफी मांगनी चाहिए और जिन अधिकारियों या लोगों की भूमिका रही है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री से अपील की कि वे छात्रों से माफी मांगकर देश के युवाओं के सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाएं।
विपक्ष बिल पर समर्थन या विरोध का करेगा फैसला
सूत्रों के मुताबिक, यदि संसद में जारी गतिरोध समाप्त होता है तो विपक्ष पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 पर विस्तृत चर्चा करेगा। साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि बिल का समर्थन किया जाए या उसमें संशोधन की मांग की जाए।
विपक्ष का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कठोर कानून आवश्यक हैं, लेकिन छात्रों के हितों और जवाबदेही से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
क्या हैं प्रस्तावित संशोधन?
प्रस्तावित संशोधन के तहत परीक्षा से जुड़े अपराधों के लिए दंड को और सख्त करने का प्रावधान किया गया है। पेपर लीक या अन्य अनुचित गतिविधियों में शामिल दोषियों को 5 से 10 वर्ष तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
वहीं, यदि परीक्षा धोखाधड़ी किसी संगठित गिरोह या आपराधिक नेटवर्क के जरिए की जाती है तो कम से कम 7 वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है।











