लखनऊ/7 अगस्त 2026। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने और बारिश के पानी के जमाव से जुड़ी शिकायतों की प्रारंभिक जांच में ड्रेनेज सिस्टम और अर्थवर्क से संबंधित कुछ खामियां सामने आई हैं। शुक्रवार को IIT खड़गपुर, स्वतंत्र लेबोरेटरी और NHAI के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने एक्सप्रेसवे का विस्तृत निरीक्षण किया। टीम ने अप और डाउन दोनों लेन मिलाकर करीब 126 किलोमीटर मार्ग का जायजा लिया और कई स्थानों से फोटो तथा नमूने जुटाए।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर ड्रेनेज में मिली प्रारंभिक खामी
चार घंटे से अधिक चले निरीक्षण के दौरान IIT खड़गपुर के प्रोफेसर केएस रेड्डी ने अलग-अलग स्थानों पर सामने आई स्थितियों को दर्ज किया। NHAI के दिल्ली से आए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी उन्होंने मौके पर चर्चा की।
ग्रीनफील्ड हिस्से में लखनऊ से कानपुर की ओर जाते समय एक स्थान पर अधिक कर्व मिला। अधिकारियों ने टीम को बताया कि नीचे से नदी गुजरने के कारण वहां सड़क का अलाइनमेंट घुमावदार है। इसी क्षेत्र में कानपुर से लखनऊ की दिशा वाली सड़क पर ढाल अपेक्षाकृत अधिक पाई गई।
निरीक्षण में यह भी देखा गया कि बारिश का पानी दोनों तरफ समान रूप से निकलने के बजाय कर्व वाले हिस्से में एक ओर अधिक जमा हो रहा था। उन्नाव के कोरारी क्षेत्र में किलोमीटर 64 के आसपास ड्रेनेज सिस्टम में भी प्रारंभिक स्तर पर कुछ कमी दिखाई दी।
मिट्टी में कई फीट नीचे तक मिली नमी
टीम ने उन स्थानों से डामर के नमूने लिए जहां सड़क धंसने की समस्या सामने आई थी। इसके साथ ही मिट्टी की खुदाई कर नमूने लिए गए। प्रारंभिक निरीक्षण में मिट्टी के भीतर कई फीट नीचे तक नमी मिलने की बात सामने आई है।
सूत्रों के मुताबिक, बारिश का पानी ग्रीनफील्ड के नीचे तक पहुंचा हो सकता है। अर्थवर्क पर्याप्त मजबूत नहीं होने की स्थिति में भारी वाहनों के दबाव से सड़क धंसने की आशंका जताई जा रही है।
ड्रेनेज लेयर की गुणवत्ता भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान ग्रीनफील्ड के नीचे मौजूद ड्रेनेज लेयर को लेकर भी सवाल सामने आए। हालांकि प्रारंभिक जांच में सड़क पर इस्तेमाल किए गए डामर की गुणवत्ता ठीक पाई गई है। अभी यह तय नहीं हुआ है कि लिए गए नमूनों की जांच IIT खड़गपुर की प्रयोगशाला में होगी या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि सामने आई कमियों में से कई को तकनीकी स्तर पर सुधारा जा सकता है। हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि नमूनों की विस्तृत जांच के बाद ही होगी।
तीन से चार दिन और चलेगी जांच
NHAI के लखनऊ परियोजना निदेशक नवरतन के अनुसार, संयुक्त टीम ने पूरे 126 किलोमीटर मार्ग का निरीक्षण कर फोटोग्राफ लिए हैं। प्रारंभिक जांच पूरी हुई है, लेकिन अभी किसी ठोस कारण पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
नवरतन के मुताबिक, जांच अगले तीन से चार दिन तक जारी रहने की संभावना है। कुछ नमूनों की रिपोर्ट तीन से चार दिन में, जबकि अन्य की रिपोर्ट आने में करीब एक सप्ताह लग सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नमूनों की जांच PNC की लैब में नहीं कराई जाएगी।
इससे पहले लोक निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता एन राम और सेतु निगम के सेवानिवृत्त महाप्रबंधक संदीप गुप्ता ने भी एक्सप्रेसवे के अर्थवर्क और ड्रेनेज व्यवस्था में संभावित कमी की ओर ध्यान दिलाया था। अब संयुक्त तकनीकी जांच में भी इन्हीं पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।










